कोच्चि: भारतीय घरेलू बाजार में काली मिर्च की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है। मसाला निर्माताओं और उत्तर भारत की ग्राइंडिंग इकाइयों (पिसाई केंद्रों) की ओर से आ रही मजबूत मांग ने बाजार को आधार दिया है। विशेष रूप से मानसून की दस्तक से पहले कच्चे माल की गुणवत्ता सुरक्षित करने के लिए कोच्चि टर्मिनल मार्केट में व्यापारियों की सक्रियता काफी बढ़ गई है।
बाजार भाव और आवक
कोच्चि टर्मिनल मार्केट में फिलहाल काली मिर्च की आवक 15-20 टन के आसपास बनी हुई है। बाजार में भाव निम्नलिखित स्तर पर देखे गए:
अनगारबल्ड (Ungarbled): ₹700 प्रति किलो
गारबल्ड (Garbled): ₹720 प्रति किलो
मानसून से पहले खरीदारी का चलन
इंडियन पेपर एंड स्पाइसेस ट्रेड एसोसिएशन (IPSTA) के किशोर शामजी ने बताया कि मानसून से पहले ग्राइंडिंग इकाइयों द्वारा भारी मात्रा में खरीदारी करना एक सामान्य और नियमित चलन है। इसका मुख्य कारण यह है कि बारिश के मौसम में नमी (Moisture) बढ़ने से काली मिर्च की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर रहता है। इसी जोखिम से बचने के लिए उत्तर भारत की फैक्ट्रियां अभी से स्टॉक जमा कर रही हैं।
उत्पादन की स्थिति: राज्यों का हाल
विभिन्न राज्यों में उत्पादन की स्थिति मिली-जुली रही है:
तमिलनाडु: जलवायु परिवर्तन की मार के कारण यहाँ उत्पादन में भारी गिरावट आई है। सामान्यत: होने वाले 12,000-15,000 टन के मुकाबले इस बार उत्पादन 5,000 टन से भी कम रहने का अनुमान है।
कर्नाटक: यहाँ फसल सामान्य रही है। पहले कॉफी के अच्छे भावों के कारण किसानों ने काली मिर्च रोक ली थी, लेकिन अब कॉफी की कीमतें कमजोर पड़ने पर किसान काली मिर्च बाजार में लाने लगे हैं।
केरल: इडुक्की जिले सहित अन्य क्षेत्रों में उत्पादन सामान्य है। इस वर्ष कुल उत्पादन 75,000 से 80,000 टन के बीच रहने का अनुमान है।
निर्यात मोर्चे पर चुनौतियां
घरेलू मांग मजबूत होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय काली मिर्च की चमक फीकी बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
पश्चिम एशिया संकट: इस कारण शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में बाधाएं आ रही हैं।
मुद्रा में उतार-चढ़ाव: विनिमय दरों में अस्थिरता से व्यापार प्रभावित हो रहा है।
अमेरिकी आयात शुल्क: अमेरिका द्वारा लगाए गए आयात शुल्कों के कारण विदेशी मांग सुस्त बनी हुई है।
निष्कर्ष: फिलहाल घरेलू बाजार पूरी तरह से उत्तर भारतीय मसाला निर्माताओं के भरोसे टिका हुआ है, जो मानसून पूर्व अपनी स्टॉक सीमाओं को सुरक्षित करने में जुटे हैं।