खेती पर अब AI का पहरा: IMD ने किसानों के लिए लॉन्च कीं दो हाई-टेक भविष्यवाणियाँ

मानसून की चाल से लेकर 1 किमी के दायरे में बारिश तक—सटीक जानकारी अब किसानों की मुट्ठी में।

13 May 2026  |  63

 

 

नई दिल्ली: भारतीय कृषि और मौसम विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार को दो क्रांतिकारी AI-सक्षम (Artificial Intelligence) सेवाएं शुरू की हैं। ये सेवाएं न केवल मानसून की सटीक जानकारी देंगी, बल्कि किसानों को खेती से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने में भी मदद करेंगी।

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने इन उत्पादों को लॉन्च करते हुए कहा कि यह पारंपरिक मौसम विज्ञान से आगे बढ़कर 'निर्णय-सहायक पूर्वानुमान' की दिशा में एक बड़ा कदम है।

1. चार सप्ताह पहले मिलेगा मानसून का 'एडवांस' सिग्नल

IMD की पहली सेवा एक ऐसी एआई-आधारित प्रणाली है जो देश के 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों को कवर करेगी।

खासियत: यह सिस्टम मानसून की प्रगति और स्थानीय बारिश की स्थिति की जानकारी 4 सप्ताह पहले ही उपलब्ध करा देगा।

फायदा: इससे किसानों को बुआई, सिंचाई और खाद प्रबंधन की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

2. यूपी में 'पायलट प्रोजेक्ट': 1 किमी के सटीक दायरे में पूर्वानुमान

उत्तर प्रदेश के लिए एक विशेष पायलट सर्विस शुरू की गई है, जो तकनीक के मामले में बेहद उन्नत है।

हाई-रिजॉल्यूशन: यह सेवा 1 किमी के रिजॉल्यूशन पर काम करती है, यानी आपके ब्लॉक या गांव के सटीक दायरे में बारिश का पता चलेगा।

एडवांस तकनीक: एआई-आधारित 'डाउनस्केलिंग टेक्नोलॉजी' का उपयोग करते हुए यह 10 दिन पहले तक बारिश का सटीक पूर्वानुमान जारी करेगी।

कैसे काम करेगी यह 'सुपर' तकनीक?

यह प्रणाली डेटा जुटाने के लिए एक विशाल और आधुनिक नेटवर्क का उपयोग करती है:

ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS) और बारिश-मापक यंत्र।

डॉप्लर रडार और सैटेलाइट डेटासेट का रियल-टाइम विश्लेषण।

एआई के जरिए इन सभी जानकारियों को प्रोसेस कर सटीक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

किसानों तक कैसे पहुँचेगी जानकारी?

सरकार ने सूचना के प्रसार के लिए डिजिटल और पारंपरिक दोनों माध्यमों का जाल बिछाया है:

डिजिटल: मोबाइल ऐप, एसएमएस अलर्ट, व्हाट्सएप और किसान पोर्टल।

सार्वजनिक माध्यम: टेलीविजन और सब्जी मंडियों व स्थानीय बाजारों में लगाए गए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड।

"ये उत्पाद किसानों, आपदा प्रबंधकों और प्रशासन को सटीक और कार्रवाई योग्य जानकारी देंगे, जिससे खेती में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।"

डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री

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