Dual OTP System: बुजुर्गों को 'डिजिटल अरेस्ट' और स्कैम से बचाएगा बैंकों का यह नया सिस्टम, जानिए कैसे करता है काम

साइबर अपराधियों के चक्रव्यूह को तोड़ेगा 'डुअल ओटीपी'; अब अकेले बुजुर्गों से पैसे नहीं ठग पाएंगे जालसाज, परिवार के पास भी पहुंचेगा अलर्ट!

17 May 2026  |  90

 

 

नई दिल्ली/हरियाणा: जैसे-जैसे देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों के पैंतरे भी खतरनाक होते जा रहे हैं। आजकल जालसाज घर के बुजुर्गों (सीनियर सिटीजन्स) को निशाना बनाने के लिए 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest), नकली इन्वेस्टमेंट स्कीम्स और डराने वाले फेक कॉल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। घबराहट में बुजुर्ग अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई इन अपराधियों के खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।

हाल ही में सरकारी विंग Cyber Dost ने भी 'X' (ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर बुजुर्गों के साथ बढ़ते इन घोटालों के प्रति आगाह किया है। इसी गंभीर खतरे से निपटने और बुजुर्गों को सुरक्षा कवच देने के लिए अब बैंकों ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, जिसे 'डुअल ओटीपी सिस्टम' (Dual OTP System) नाम दिया गया है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि यह सिस्टम क्या है और यह हमारे घर के बुजुर्गों की जेब को कैसे सुरक्षित रखेगा।

क्या है डुअल ओटीपी (Dual OTP) सिस्टम?

आमतौर पर जब भी हम कोई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं, तो बैंक खाते से लिंक्ड मोबाइल नंबर पर एक ही (Single) OTP आता है। लेकिन 'डुअल ओटीपी सिस्टम' के आने के बाद अब ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी और सुरक्षा की एक अभेद्य दीवार खड़ी होगी।

इस नए सिस्टम के तहत सुरक्षा की दो परतें (Two-Layer Verification) काम करेंगी:

पहला OTP: हमेशा की तरह मुख्य खाताधारक (बुजुर्ग नागरिक) के मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा।

दूसरा OTP: बुजुर्ग के परिवार के किसी अन्य भरोसेमंद सदस्य (बेटा, बेटी या जीवनसाथी) के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा।

सबसे बड़ा फायदा: जब तक ये दोनों ओटीपी बैंक के सिस्टम में नहीं डाले जाएंगे, तब तक खाते से एक भी रुपया ट्रांसफर नहीं होगा। यानी सिर्फ एक ओटीपी के दम पर अब कोई भी जालसाज धोखाधड़ी नहीं कर पाएगा।

बुजुर्गों को बचाने में यह सिस्टम कैसे मददगार होगा?

अकेलेपन का फायदा नहीं उठा पाएंगे ठग: स्कैमर्स अक्सर बुजुर्गों को तब फोन करते हैं जब वे घर पर अकेले होते हैं। वे डरा-धमकाकर या लालच देकर उनसे ओटीपी ले लेते हैं। इस सिस्टम के बाद यदि बुजुर्ग डरकर ओटीपी बता भी दें, तो दूसरा ओटीपी परिवार के सदस्य के पास जाएगा, जिससे ठगी तुरंत पकड़ में आ जाएगी।

संदेहास्पद लेनदेन पर तुरंत अलर्ट: यदि कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन करने की कोशिश की जाएगी, तो परिवार के सदस्यों को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा, जिससे वे समय रहते कदम उठा सकेंगे।

अनधिकृत ट्रांजैक्शन पर पूरी रोक: बिना परिवार की जानकारी के बुजुर्गों के खाते से कोई भी अन-अथोराइज्ड ऑनलाइन ट्रांसफर मुमकिन नहीं होगा।

कहां शुरू हुई है यह सेवा?

यह बेहतरीन सुरक्षा प्रणाली पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हरियाणा के फरीदाबाद, नूंह (Nuh), गुरुग्राम और पलवल की 50 से ज्यादा बैंक शाखाओं (Bank Branches) में सफलतापूर्वक रोलआउट की जा चुकी है। इसके अलावा, इस सिस्टम के दायरे को बढ़ाने के लिए देश के बड़े प्राइवेट बैंकों के साथ भी लगातार काम चल रहा है।

साइबर फ्रॉड से बचने के लिए ध्यान रखें ये 3 बातें

नियमित जागरूकता: अपने माता-पिता और परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को नए-नए साइबर फ्रॉड (जैसे डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी स्कैम) के बारे में नियमित रूप से बताते रहें।

सख्त हिदायत: बुजुर्गों को समझाएं कि अनजान कॉल्स या पुलिस/सरकारी अधिकारी बनकर डराने वाले लोगों के साथ कभी भी ओटीपी (OTP) शेयर न करें और न ही तुरंत पैसे ट्रांसफर करें।

बैंक से संपर्क: यदि आप भी अपने माता-पिता के खाते पर 'Dual OTP' सुविधा एक्टिवेट कराना चाहते हैं, तो आज ही अपनी नजदीकी बैंक शाखा में जाकर इसकी जानकारी लें।

यदि फ्रॉड हो जाए, तो तुरंत यहां करें शिकायत

अगर आपके घर में किसी भी बुजुर्ग के साथ कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी या फ्रॉड हो जाता है, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत एक्शन लें:

आपातकालीन सेवासंपर्क का माध्यम
साइबर हेल्पलाइन नंबर1930 (इस नंबर पर तुरंत कॉल कर घटना दर्ज कराएं)
आधिकारिक वेबसाइटcybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें

निष्कर्ष: तकनीकी विकास के इस दौर में सुरक्षा सतर्कता से ही आती है। बैंकों का 'डुअल ओटीपी' सिस्टम वास्तव में बुजुर्गों की फाइनेंशियल सेफ्टी के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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