कॉरपोरेट जगत में बड़ा उलटफेर: HDFC बैंक को पछाड़ भारती एयरटेल बनी देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी

₹20,000 की उधारी से खड़ा हुआ ₹11 लाख करोड़ का एम्पायर; सुनील भारती मित्तल की 'एयरटेल' ने शेयर बाजार में रचा नया इतिहास।

18 May 2026  |  69

 

मुंबई/नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को एक ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला। देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) ने बाजार पूंजीकरण (Market Cap) के मामले में बैंकिंग क्षेत्र के महारथी HDFC बैंक को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार बढ़त के साथ ही एयरटेल अब रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है।

यह उपलब्धि न केवल एयरटेल के व्यावसायिक दबदबे को दर्शाती है, बल्कि इसके संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल के उस जुझारूपन की गवाही भी देती है, जिन्होंने कभी महज 20,000 रुपये के शुरुआती निवेश से अपने करियर की शुरुआत की थी।

बाजार में नंबर-2 की कुर्सी के लिए 'कांटे की टक्कर'

सोमवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत में भारती एयरटेल के शेयरों में लगातार चौथे दिन तेजी का रुख रहा, जिससे कंपनी का मार्केट कैप 11.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान HDFC बैंक का मार्केट कैप 11.74 लाख करोड़ रुपये था।

हालांकि, दोपहर होते-होते बाजार में दोनों दिग्गजों के बीच दूसरे स्थान के लिए दिलचस्प जंग देखने को मिली:

दोपहर 12:30 बजे की स्थिति: HDFC बैंक ने थोड़ी रिकवरी की और उसका मार्केट कैप 11.87 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा, जबकि एयरटेल 11.84 लाख करोड़ रुपये के साथ उसके बिल्कुल करीब टिकी रही।

नंबर वन पर रिलायंस: वर्तमान में 18.11 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के तौर पर शीर्ष पर काबिज है।

साइकिल के पुर्जों से ग्लोबल एम्पायर तक: सुनील मित्तल का सफर

सुनील भारती मित्तल की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 23 अक्टूबर 1957 को लुधियाना में जन्मे मित्तल के पिता सत पाल मित्तल भले ही राज्यसभा सांसद थे, लेकिन उन्होंने पारिवारिक रसूख के बजाय अपनी मेहनत से रास्ता चुनना बेहतर समझा।

18 साल की उम्र में पहली उधारी: साल 1976 में पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता से 20,000 रुपये उधार लिए और दोस्तों के साथ मिलकर लुधियाना में साइकिल के क्रैंकशाफ्ट (पुर्जे) बनाने का छोटा सा काम शुरू किया।

जनरेटर बैन का लगा झटका: 1980 में उन्होंने मुंबई का रुख किया और जापान से पोर्टेबल जनरेटर आयात करने का बिजनेस शुरू किया। काम अच्छा चल निकला, लेकिन तभी सरकार ने जनरेटर आयात पर बैन लगा दिया और उनका बिजनेस रातों-रात ठप हो गया।

ऐसे बदला भारतीय टेलीकॉम का इतिहास

"मुश्किलें आपको रोकने के लिए नहीं, बल्कि नया रास्ता दिखाने के लिए आती हैं।"

इस झटके से उबरते हुए मित्तल ने 1984 में 'भारती टेलीकॉम लिमिटेड' की नींव रखी। उन्होंने जर्मनी की दिग्गज कंपनी 'सीमेंस' के साथ हाथ मिलाया और भारत में 'बीटेल' (Beetel) ब्रांड नाम से पुश-बटन वाले टेलीफोन, फैक्स मशीन और कॉर्डलेस फोन बनाने शुरू किए। यही वह टर्निंग पॉइंट था जिसने मित्तल को टेलीकॉम सेक्टर का बेताज बादशाह बनाने की राह दिखाई। आज उनकी कुल संपत्ति (Net Worth) 34.2 अरब डॉलर (लगभग 3.30 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच चुकी है।

आज भारती एयरटेल का देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनना यह साबित करता है कि दूरदर्शी सोच और सही समय पर लिए गए रिस्क किसी भी साधारण शुरुआत को असाधारण साम्राज्य में बदल सकते हैं।

अन्य खबरें