चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर भारी उथल-पुथल के संकेत मिल रहे हैं। डीएमके (DMK) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान देकर सूबे की सियासत को गरमा दिया है। स्टालिन का मानना है कि अभिनेता से राजनेता बने जोसेफ विजय (टीवीके प्रमुख) के नेतृत्व वाली मौजूदा तमिलनाडु सरकार कभी भी गिर सकती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कमर कसने और किसी भी वक्त समय पूर्व चुनाव के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।
बहुमत के आंकड़ों का 'पेच': कैसे खतरे में है विजय सरकार?
मौजूदा विधानसभा में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के पास अपनी 107 सीटें हैं और सहयोगी कांग्रेस की 5 सीटों के साथ उसे डीएमके के चार पूर्व सहयोगियों (प्रत्येक के पास 2 सीटें) का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते हुए विश्वास मत के दौरान एआईएडीएमके (AIADMK) के 25 बागी विधायकों ने भी सरकार के पक्ष में मतदान किया था, जिससे सरकार को बहुमत मिला हुआ है।
डीएमके सूत्रों के मुताबिक, यह सरकार दो वजहों से संकट में आ सकती है:
यदि टीवीके को समर्थन दे रहे सहयोगी दल—वीसीके (VCK), सीपीआई (CPI), सीपीएम (CPM) और आईयूएमएल (IUML) अपना रुख बदलते हैं और समर्थन वापस लेते हैं।
यदि तमिलनाडु के स्पीकर या अदालत द्वारा एआईएडीएमके के उन 25 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है, जिनके दम पर सरकार टिकी है।
"तमिलनाडु में 'सूरज' कभी अस्त नहीं होगा, 2029 में एक साथ हो सकते हैं चुनाव"
सोमवार को डीएमके के जिला सचिवों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भावुक और आक्रामक अंदाज में स्टालिन ने कहा:
"यह हार अस्थायी है। मौजूदा सरकार का ढांचा कमजोर है और यह कभी भी गिर सकती है। पूरी संभावना है कि साल 2029 के लोकसभा चुनावों के साथ ही तमिलनाडु में दोबारा विधानसभा चुनाव करा दिए जाएं। आप सभी तैयार रहें, हम जोरदार वापसी करेंगे और फिर से जीतेंगे।"
अपनी पार्टी का हौसला बढ़ाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, "तमिलनाडु की राजनीति में 'सूरज' (DMK का चुनाव चिह्न) कभी अस्त नहीं होगा।"
हार की जिम्मेदारी ली, सोशल मीडिया पर 'वार' करने की दी नसीहत
इस चुनाव में मिली असफलता की पूरी जवाबदेही अपने सिर लेते हुए स्टालिन ने माना कि पार्टी को डिजिटल मोर्चे पर अपनी रणनीति बदलनी होगी। उन्होंने इशारों-इशारों में स्वीकार किया कि विजय की पार्टी टीवीके सोशल मीडिया पर काफी मजबूत है।
"जिस राजनीति पर हम कभी चाय की दुकानों पर बैठकर चर्चा करते थे, अब उस पर सोशल मीडिया हैंडल्स पर आक्रामक ढंग से बात होनी चाहिए। पार्टी को डिजिटल स्पेस में अपनी मौजूदगी बढ़ानी होगी।"
— एम.के. स्टालिन
जमीन पर वापसी के लिए बनाई 36 सदस्यीय समिति
सिर्फ बयानों तक सीमित न रहकर स्टालिन ने चुनावी हार के कारणों का गहरा विश्लेषण करने के लिए 36 सदस्यों वाली एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी कर दिया है। यह समिति सीधे जनता के बीच जाएगी, उनसे फीडबैक लेगी और यह पता लगाएगी कि पारंपरिक रूप से मजबूत रही डीएमके का जनाधार कहां और क्यों खिसका। इस कदम को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकने और खोया हुआ विश्वास वापस पाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।