खाद्य तेल आयात में 3% का उछाल: साल भर में देश ने फूंके ₹1.5 लाख करोड़ ($18.3 अरब), नेपाल से 'ड्यूटी-फ्री' आवक दोगुनी से अधिक हुई

SAFTA समझौते का दिखा बड़ा असर; नेपाल से रिफाइंड सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात में 113% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी, घरेलू आत्मनिर्भरता पर बढ़ा फोकस।

19 May 2026  |  54

 

नई दिल्ली। देश में खाद्य तेलों (Edible Oils) की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए विदेशी निर्भरता और सरकारी खर्च का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इंडस्ट्री बॉडी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्य तेल आयात 3 फीसदी बढ़कर 166.51 लाख टन पर पहुंच गया है। इसके पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 161.82 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया था।

इस बार के आयात आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाला उछाल पड़ोसी देश नेपाल से होने वाली आवक में देखा गया है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।

SAFTA समझौता: नेपाल से आयात में 113% की बंपर बढ़ोतरी

भारत और नेपाल के बीच हुए दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते (SAFTA) का सीधा असर इस साल के व्यापारिक आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है। इस समझौते के तहत नेपाल को भारतीय बाजार में शून्य शुल्क (Zero Duty) पर खाद्य तेल निर्यात करने की विशेष सुविधा मिलती है।

रिकॉर्ड सप्लाई: इस ड्यूटी-फ्री व्यवस्था के चलते नेपाल ने इस साल भारत को 7.36 लाख टन एडिबल ऑयल एक्सपोर्ट किया।

दोगुना से अधिक उछाल: पिछले फाइनेंशियल ईयर में नेपाल से मात्र 3.45 लाख टन तेल आया था। इस लिहाज से इस बार नेपाल से होने वाले आयात में 113 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की सबसे ज्यादा मांग

SEA की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल से रूट होकर भारतीय बाजारों में आने वाले तेलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रिफाइंड सोयाबीन तेल की रही। इसके अलावा नेपाल के रास्ते भारत में निम्नलिखित तेलों की भी भारी सप्लाई हुई है:

सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil)

RBD पामोलीन (RBD Palmolein)

रेपसीड ऑयल (Rapeseed Oil)

एसोसिएशन (SEA) का कहना है कि नेपाल से रिफाइंड तेलों के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट में आई इस तेजी ने देश के कुल खाद्य तेल आयात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

खाद्य तेलों पर हर साल $18.3 अरब का भारी-भरकम खर्च

भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदकर पूरा करता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हर साल औसतन 15 से 16 मिलियन टन (150-160 लाख टन) खाद्य तेलों का आयात किया जाता है। इसके लिए देश को हर साल लगभग 18.3 अरब डॉलर (करीब ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक) की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।

आत्मनिर्भरता की अपील: आयात घटाने पर सरकार का जोर

खाद्य तेलों पर देश के खजाने से होने वाले इस भारी खर्च को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन (Fuel) बचाने की अपील के साथ-साथ खाने के तेल के उपयोग में भी विवेकपूर्ण कटौती करने का आग्रह किया था।

नतीजा: सरकार का मुख्य उद्देश्य देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता को कम करना है, ताकि देश का पैसा देश के किसानों के काम आ सके। आगामी बजट और नीतियों में घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदमों की उम्मीद की जा रही है।

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