मिशन 'टेरर' पर भारी पड़ा 'ग्लैमर': भारत में स्लीपर सेल बनाने आए लश्कर आतंकियों को चढ़ा कॉस्मेटिक सर्जरी का चस्का

हवाई अड्डों के सुरक्षा अलार्म से बचने की चालाकी या गिरता हुआ आत्मविश्वास? सुरक्षा एजेंसियों की चार्जशीट में हुआ लश्कर के आतंकियों के 'मेकओवर' का बड़ा खुलासा!

20 May 2026  |  98

 

नई दिल्ली: आतंकवादी संगठनों के ट्रेनिंग कैंपों में सिखाया जाने वाला आक्रामक प्रोपेगैंडा और कट्टरपंथ का जोश, असल जिंदगी की हकीकत के सामने किस तरह फुस्स हो जाता है, इसका एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का खूंखार पाकिस्तानी आतंकी उस्मान जट्ट उर्फ 'चीनी' भारत में एक बड़े मिशन पर था। उसे यहाँ स्लीपर सेल तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन, भारत में घुसपैठ करने के बाद वह अपना आतंकी मिशन भूलकर श्रीनगर के एक मेडिकल क्लिनिक में 'हेयर ट्रांसप्लांट' करवाने पहुंच गया।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा जल्द ही कोर्ट में पेश की जाने वाली चार्जशीट में आतंकवादियों के इस 'ब्यूटी कॉन्शियस' रवैये का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोला गया है।

गंजेपन से टूट गया था हौसला, दाँतों के इलाज के लिए गुड़गांव पहुंचा दूसरा आतंकी

पूछताछ के दौरान उस्मान जट्ट ने कबूल किया कि तेजी से झड़ते बालों की वजह से उसका आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान बुरी तरह टूट चुका था। नतीजा यह हुआ कि उसने संगठन के काम को दरकिनार कर अपने लुक को सुधारने को तरजीह दी।

जट्ट अकेला ऐसा आतंकी नहीं है जो अपनी शक्ल-सूरत को लेकर परेशान था। मार्च में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़े लश्कर के एक अन्य गुर्गे, शब्बीर अहमद लोन ने भी कुछ ऐसा ही किया था। बांग्लादेश में लश्कर का नेटवर्क खड़ा करने में जुटे लोन ने दिल्ली से सटे गुड़गांव के एक महंगे प्राइवेट क्लिनिक में जाकर अपने दांतों का कॉस्मेटिक इलाज करवाया था। लोन को पुलिस ने तब दबोचा जब उसके गुर्गों ने AI समिट से पहले शहर में भड़काऊ पोस्टर लगाए थे।

क्या 26/11 के मास्टरमाइंड साजिद मीर से मिली प्रेरणा?

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों का यह शौक सिर्फ व्यक्तिगत दिखावा नहीं, बल्कि सुरक्षा घेरे को चकमा देने की एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है।

"26/11 मुंबई हमलों का मुख्य साजिशकर्ता साजिद मीर सालों पहले पहचान छिपाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करवा चुका है। वहीं कोल्ड वॉर के दौर का कुख्यात अंतरराष्ट्रीय हत्यारा 'कार्लोस द जैकल' भी अपना चेहरा बदलवाने के लिए मशहूर था।" — जांच अधिकारी, दिल्ली पुलिस

चेहरे और हुलिए में बदलाव करने के पीछे आतंकियों का मुख्य मकसद नकली पासपोर्ट बनवाना और हवाई अड्डों पर लगे आधुनिक फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाले) सिस्टम और स्वचालित सुरक्षा अलार्म को चकमा देना होता है।

कट्टरपंथ पर भारी पड़ी मानसिक उलझन

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जांचकर्ताओं का मानना है कि इन मामलों को महज इत्तेफाक मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। एक तरफ जहाँ यह अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने का एक शातिर तरीका है, वहीं दूसरी तरफ यह इस बात का भी सबूत है कि आतंकी कैंपों का 'ब्रेनवॉश' इंसानी दिमाग की बुनियादी मानसिक परेशानियों और निजी हीनभावना के आगे कमजोर पड़ जाता है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है कि इन आतंकियों को इन महंगे क्लीनिकों तक पहुंचाने में किन स्थानीय मददगारों (ओजीडब्ल्यू) ने भूमिका निभाई थी।

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