चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में बड़ा कानूनी रुख स्पष्ट किया है। हाई कोर्ट ने साफ किया है कि अफीम पोस्ता (Opium Poppy) की अवैध खेती करने के मामलों को कानूनन 'कमर्शियल क्वांटिटी' (व्यावसायिक मात्रा) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों को 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाना एक स्पष्ट कानूनी त्रुटि और प्रत्यक्ष अवैधता है। जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने हरियाणा के पानीपत निवासी सत्यवान द्वारा दायर की गई अपील पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक टिप्पणी की।
क्या था पूरा मामला?
मामले के अनुसार, 13 मार्च 2019 को पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी सत्यवान अपनी बहन की जमीन पर अवैध रूप से अफीम पोस्ता की खेती कर रहा है।
बरामदगी: पुलिस ने मौके पर छापेमारी कर 152 पोस्ता के पौधे बरामद किए थे, जिनका कुल वजन 11.560 किलोग्राम मापा गया था।
निचली अदालत का फैसला: पानीपत की ट्रायल कोर्ट ने इस वजन को 'कमर्शियल क्वांटिटी' मानते हुए आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 18(बी) के तहत दोषी ठहराया और 20 वर्ष की कठोर कैद की भारी-भरकम सजा सुना दी थी।
हाई कोर्ट की फटकार: धारा 18(बी) नहीं, धारा 18(सी) होगी लागू
अपीलकर्ता के वकील की दलीलों और केंद्र सरकार की 19 अक्टूबर 2001 की अधिसूचना का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने कानून को समझने में भारी चूक की है। अफीम पोस्ता की खेती के मामलों में “स्माल क्वांटिटी” या “कमर्शियल क्वांटिटी” का कोई अलग वर्गीकरण नहीं है।
अदालत की बड़ी टिप्पणी: "अफीम पोस्ता की खेती से जुड़े अपराध एनडीपीएस एक्ट की धारा 18(सी) के तहत दंडनीय हैं, न कि धारा 18(बी) के तहत। निचली अदालत यह तार्किक रूप से समझाने में पूरी तरह विफल रही कि आखिर यह मामला कमर्शियल क्वांटिटी की श्रेणी में कैसे आ गया।"
'अदालत एक दिन भी अधिक की सजा नहीं दे सकती'
हाई कोर्ट ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 20(1) (Article 20(1)) का उल्लेख करते हुए न्यायपालिका को उसकी सीमाओं की याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि जब देश का कानून किसी अपराध के लिए अधिकतम सजा की सीमा तय कर देता है, तो कोई भी अदालत अपराधी को उससे एक दिन भी अधिक की सजा नहीं दे सकती।
| धारा | प्रावधान और सजा की सीमा (पोस्ता खेती मामले में) |
|---|---|
| धारा 18(बी) | व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) के लिए लागू, जिसमें न्यूनतम 10 से अधिकतम 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। |
| धारा 18(सी) | अफीम पोस्ता की अवैध खेती पर लागू, जहां अधिकतम सजा केवल 10 वर्ष तक ही हो सकती है। |
अब आगे क्या?
हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि इस मामले में अधिकतम सजा 10 साल ही हो सकती थी, इसलिए 20 साल की सजा पूरी तरह कानून के विपरीत है। अदालत ने आरोपी की दोषसिद्धि (Conviction) को बरकरार रखा है, लेकिन ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई 20 साल की सजा पर तुरंत रोक लगा दी है। कोर्ट ने अब मामले को केवल 'सजा की अवधि' (Quantum of Sentence) को दोबारा तय करने के उद्देश्य से वापस निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) को भेज दिया है।