सत्ता बदलते ही चक्रव्यूह में फंसे अभिषेक बनर्जी: शुभेंदु सरकार के वो 4 बड़े फैसले, जिन्होंने बढ़ाईं टीएमसी सांसद की मुश्किलें

Z+ सुरक्षा छिनी, 21 संपत्तियों पर नगर निगम का नोटिस; ममता बनर्जी के कुर्सी से हटते ही शुभेंदु अधिकारी के निशाने पर आए भतीजे अभिषेक।

20 May 2026  |  54

 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सियासी इतिहास में मई 2026 का महीना एक अभूतपूर्व मोड़ लेकर आया है। सूबे में 15 साल पुराने ममता बनर्जी के साम्राज्य को उखाड़ फेंकते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटों के साथ ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया। 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और कार्यभार संभालते ही पूर्ववर्ती सरकार के सबसे ताकतवर चेहरों पर कानूनी व प्रशासनिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया।

इस सत्ता परिवर्तन का सबसे बड़ा असर डायमंड हार्बर से टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के रडार पर आते ही अभिषेक बनर्जी को एक के बाद एक कई बड़े झटके लगे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।

1. केंद्रीय गृह मंत्री को धमकी का आरोप, दर्ज हुई FIR

अभिषेक बनर्जी को पहला बड़ा झटका चुनावी बयानों को लेकर लगा है। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी नेताओं (अब सत्तापक्ष) के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है।

क्या है मामला: चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व अन्य बीजेपी नेताओं को सीधे मंच से धमकी दी थी। उन्होंने कहा था, "मैं देखूंगा कि 4 मई (नतीजे के दिन) को उन्हें बचाने कौन आता है।"

कानूनी शिकंजा: इस बयान को लेकर राजीव सरकार नाम के व्यक्ति ने अभिषेक के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है। इस प्राथमिकी को रद्द कराने के लिए टीएमसी सांसद को अब कलकत्ता हाईकोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

2. 'Z-Plus' सुरक्षा वापस, आम सांसद की तरह का रुतबा

सत्ता से बाहर होते ही प्रशासनिक गलियारों में अभिषेक बनर्जी का रसूख भी कम होता दिख रहा है। नई सरकार ने वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा करते हुए बड़ा फैसला लिया।

सुरक्षा में कटौती: पिछले 10 सालों से अभिषेक बनर्जी को मिल रही 'जेड-प्लस' (Z+) सुरक्षा तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई है। अब उन्हें केवल एक आम सांसद के तौर पर मिलने वाली सामान्य सुरक्षा ही दी गई है। उनके अलावा टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी और पूर्व आईपीएस राजीव कुमार की सुरक्षा में भी भारी कटौती की गई है। हालांकि, सीएम शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।

3. कोलकाता नगर निगम का एक्शन: 21 संपत्तियों का मांगा हिसाब

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि अभिषेक बनर्जी की कुल 24 संपत्तियां जांच के दायरे में हैं। इस दावे के ठीक बाद कोलकाता नगर निगम (KMC) ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी।

विभाग और एक्टकी गई कार्रवाईप्रमुख संपत्तियां जो निशाने पर हैं
भवन विभाग अधिनियम, धारा 400(1)21 संपत्तियों का पूरा हिसाब-किताब और लीगल दस्तावेज तलब किए गए।हरीश मुखर्जी रोड स्थित 'शांतिनिकेतन भवन' और कालीघाट क्रॉसिंग के पास बनी इमारत।

 

नगर निगम के नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि इन आलीशान इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के मुताबिक नहीं किया गया है, जिसके लिए उन्हें सभी जरूरी कागजातों के साथ निकाय के सामने पेश होना होगा।

4. चुनाव से ठीक दो दिन पहले 'राइट हैंड' जहांगीर खान ने छोड़ा मैदान

अभिषेक बनर्जी के लिए सबसे बड़ा सांगठनिक और व्यक्तिगत झटका उनके सबसे भरोसेमंद साथी और डायमंड हार्बर के चुनावी रणनीतिकार जहांगीर खान का पीछे हटना रहा।

चुनावी अनियमितताओं के चलते चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना की फलता विधानसभा सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान (Repolling) कराने का आदेश दिया था। इस सीट पर जहांगीर खान का सीधा मुकाबला बीजेपी के देबांशु पांडा से था। लेकिन वोटिंग से महज दो दिन पहले 19 मई को जहांगीर खान ने अचानक चुनाव न लड़ने का ऐलान करते हुए अपना नाम वापस ले लिया। इस अप्रत्याशित कदम ने राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है कि क्या अभिषेक का यह मजबूत सिपहसालार भी अब पाला बदलने की तैयारी में है?

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री की कुर्सी से ममता बनर्जी के हटते ही बंगाल के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। कभी राज्य की राजनीति के केंद्र में रहने वाले अभिषेक बनर्जी आज कानूनी लड़ाइयों, सुरक्षा में कटौती और अपने करीबियों के राजनीतिक पलायन से चौतरफा घिर चुके हैं।

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