यस बैंक AT-1 बॉन्ड मामला: सुप्रीम कोर्ट ने वित्त मंत्रालय से तलब किए कैबिनेट रिकॉर्ड, सॉलिसिटर जनरल को दोपहर 3 बजे तक का समय

₹8,415 करोड़ के एडिशनल टियर-1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; कैबिनेट बैठक के नियमों, कोरम और उपस्थित सदस्यों के नाम सार्वजनिक करने के निर्देश।

20 May 2026  |  58

 

 

नई दिल्ली। यस बैंक के ₹8,415 करोड़ रुपये के एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को माफ (बट्टे खाते में डालना) करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय पर कड़ी नाराजगी जताई है। देश की शीर्ष अदालत ने इस बड़े वित्तीय फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता को आज बुधवार दोपहर 3 बजे तक इससे जुड़े सभी गोपनीय कैबिनेट रिकॉर्ड, बैठक के प्रस्ताव और अन्य संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।

यह मामला साल 2023 में यस बैंक के पुनर्गठन (Restructuring) के दौरान निवेशकों के अरबों रुपये के बॉन्ड को शून्य घोषित करने से जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां और निर्देश

जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने वित्त मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने साफ किया कि इतने बड़े पैमाने पर निवेशकों के पैसे को माफ करने के फैसले के पीछे की निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

अदालत ने सॉलिसिटर जनरल को दोपहर 3 बजे तक निम्नलिखित विवरण प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं:

कैबिनेट प्रस्ताव और कार्य चर्चा: वह मूल प्रस्ताव और कैबिनेट बैठक के दौरान हुई चर्चा का पूरा ब्योरा, जिसके आधार पर साल 2023 में ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ (Write-off) करने का फैसला लिया गया था।

कोरम का विवरण: निर्णय लेने वाली कैबिनेट बैठक के नियमों का पूर्ण प्रकटीकरण और कोरम (आवश्यक न्यूनतम सदस्य संख्या) की विस्तृत जानकारी।

उपस्थित सदस्यों के नाम: उस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने वाले सभी नीति-निर्माताओं और सदस्यों के नाम।

क्या है पूरा मामला और विवाद की पृष्ठभूमि?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब वित्तीय संकट से जूझ रहे यस बैंक को बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार ने एक पुनर्गठन योजना तैयार की थी।

घटनाक्रमविवरण
निवेश की राशिरिलायंस निप्पॉन जैसे म्यूचुअल फंड, संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों ने यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में ₹8,415 करोड़ लगाए थे।
प्रशासनिक फैसला (2023)बैंक को संकट से उबारने के लिए योजना के तहत इन सभी AT-1 बॉन्ड को पूरी तरह से बट्टे खाते में (माफ) डाल दिया गया, जिससे निवेशकों का पैसा डूब गया।
बॉम्बे हाई कोर्ट का रुखखुदरा निवेशकों ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। जनवरी 2023 में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए RBI और यस बैंक के इस फैसले को रद्द कर दिया और निवेशकों को राहत दी।
सुप्रीम कोर्ट में अपीलबॉम्बे हाई कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ यस बैंक, आरबीआई और केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जिस पर अब सुनवाई चल रही है।

 

एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड क्या होते हैं?

ये एक प्रकार के असुरक्षित (Unsecured) और स्थायी (Perpetual) बॉन्ड होते हैं, जिन्हें बैंक अपनी मुख्य पूंजीगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जारी करते हैं। इन पर ब्याज दर सामान्य बॉन्ड से अधिक होती है, लेकिन इनमें जोखिम भी सबसे ज्यादा होता है। यदि बैंक किसी गंभीर वित्तीय संकट में फंसता है, तो आरबीआई के पास इन बॉन्ड को पूरी तरह से राइट-ऑफ करने या इक्विटी में बदलने का अधिकार होता है।

आगे क्या?

दोपहर 3 बजे सॉलिसिटर जनरल द्वारा सौंपे जाने वाले कैबिनेट दस्तावेजों और चर्चा के विवरण के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है या फिर वित्त मंत्रालय और आरबीआई की दलीलों को स्वीकार करता है। अदालत के इस रुख से देश के बैंकिंग रेगुलेशन और खुदरा निवेशकों के अधिकारों पर दूरगामी असर पड़ेगा।

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