फलता पुनर्मतदान: अभेद्य सुरक्षा के बीच वोटिंग जारी; TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर छोड़ा मैदान, BJP की जीत का दावा

EVM पर रहेगा नाम पर रेस से बाहर हुए जहांगीर; मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बोले— "भाग गया क्योंकि पोलिंग एजेंट नहीं मिल रहे थे", बूथों पर CAPF का कड़ा पहरा।

21 May 2026  |  63

 

 

कोलकाता/फलता: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर आज (गुरुवार) सुबह 7 बजे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुनर्मतदान (Repoll) जारी है। चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के ऐसे अभेद्य इंतजाम किए हैं जो पहले की तुलना में दोगुने हैं। 285 बूथों पर फैले इस चुनाव में 2.36 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जिसमें सुबह 9 बजे तक 20.47% मतदान दर्ज किया जा चुका है।

यह पुनर्मतदान हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण (29 अप्रैल) के दौरान बड़े पैमाने पर लगी गड़बड़ियों और धांधली के आरोपों के बाद कराया जा रहा है।

चुनावी मोड़ पर बड़ा धमाका: TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने छोड़ा मैदान

इस पुनर्मतदान के बीच सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया, जब वोटिंग से ठीक 48 घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी जहांगीर खान ने अचानक चुनावी मैदान छोड़ने का एलान कर दिया। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा:

"मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फलता के विकास के लिए 'स्पेशल पैकेज' की घोषणा की है। मैं इस चुनाव से पीछे हट रहा हूँ।"

हालांकि, नामांकन वापस लेने की कानूनी समय-सीमा पहले ही समाप्त हो जाने के कारण, EVM मशीन पर जहांगीर खान का नाम और TMC का चुनाव चिह्न बरकरार रहेगा, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से इस मुकाबले से बाहर हो चुके हैं। अब मुख्य मुकाबला BJP के देबांग्शु पांडा, CPI(M) के शंभू नाथ कुर्मी और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच है।

शुभेंदु अधिकारी का पलटवार, BJP उम्मीदवार बोले— "डेढ़ लाख से जीतेंगे"

TMC उम्मीदवार के मैदान छोड़ने पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तीखा तंज कसते हुए कहा, "वह (जहांगीर खान) इसलिए भाग गया क्योंकि उसे बूथों पर बैठने के लिए कोई पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहा था।"

वहीं, मतदान केंद्र का जायजा लेने पहुंचे BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने जीत का भरोसा जताते हुए कहा:

"माहौल उत्सव जैसा है, लोग खुशी-खुशी वोट डाल रहे हैं। पुष्पा (जहांगीर खान) को समझ आ गया था कि उन्हें 5-7 हजार से ज्यादा वोट नहीं मिलने वाले, इसलिए वे भाग खड़े हुए। BJP यहाँ डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी।"

क्यों रद्द हुआ था फलता का चुनाव?

फलता में राजनीतिक तनाव और पुनर्मतदान की नौबत पिछली वोटिंग के दौरान सामने आई गंभीर कूटनीतिक और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण आई।

EVM से छेड़छाड़: कई बूथों से शिकायतें आईं कि EVM बटन पर परफ्यूम जैसे रासायनिक पदार्थ और चिपकने वाले टेप लगाए गए थे। चुनाव आयोग के पूर्व विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता की जांच में कम से कम 60 बूथों पर छेड़छाड़ के पुख्ता सबूत मिले।

वेबकैम से छेड़खानी: मतदान केंद्रों पर पारदर्शिता के लिए लगाए गए वेब कैमरों की फुटेज को भी ब्लॉक या बाधित करने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद पोलिंग स्टाफ और पर्यवेक्षकों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम: हर बूथ पर 8 केंद्रीय जवान

किसी भी अप्रिय घटना या पुनरावृत्ति को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है:

35 कंपनियां CAPF: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कुल 35 कंपनियां तैनात की गई हैं।

8 जवान प्रति बूथ: सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक बूथ पर एक पूरी सैन्य टुकड़ी के बराबर (8 जवान) तैनात हैं।

30 क्यूआरटी (QRT): किसी भी बूथ पर गड़बड़ी की सूचना मिलने पर तुरंत एक्शन के लिए 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमें मुस्तैद हैं।

मतदाताओं में दिखा उत्साह: "15 साल बाद बिना डरे आए बूथ पर"

अभेद्य सुरक्षा का असर जमीन पर भी साफ दिख रहा है। मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े आम लोगों में सुरक्षा को लेकर भारी संतुष्टि है। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए एक स्थानीय बुजुर्ग मतदाता ने भावुक होकर कहा:

"आज बिल्कुल वैसा ही माहौल है जैसा मेरे बचपन में हुआ करता था। 15 साल पहले तो हमें बूथ तक आने की इजाजत भी नहीं थी, गुंडे गेट पर ही रोक देते थे और हमें वोट डालने से डर लगता था। आज मैं बहुत खुश हूँ कि बिना किसी डर के अपना वोट डाल पा रहा हूँ।"

अन्य खबरें