कोलकाता/नई दिल्ली: देश की सुरक्षा से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारियां सीमा पार भेजने वाले एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एनआईए ने पाकिस्तान समर्थित एक मुख्य जासूस को गिरफ्तार किया है, जो कोलकाता का रहने वाला है। आरोपी पर भारत विरोधी आतंकी साजिश के तहत गुपचुप तरीके से सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों (PIOs) तक पहुंचाने का संगीन आरोप है।
पकड़े गए आरोपी की पहचान जफर रियाज उर्फ रिज़वी के रूप में हुई है, जिसके खिलाफ पहले ही ‘लुक आउट सर्कुलर’ (LOC) जारी किया जा चुका था। जब उसे हिरासत में लिया गया, तब उसे अदालत द्वारा ‘घोषित अपराधी’ (PO) घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही थी।
पाकिस्तानी नागरिक से की शादी, 20 साल से था ISI के संपर्क में
एनआईए की जांच (केस संख्या: RC-12/2025/NIA/DLI) से जफर रियाज को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी साल 2005 से ही लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच यात्राएं कर रहा था।
पारिवारिक संबंध: जफर ने एक पाकिस्तानी नागरिक से शादी की थी और उसके बच्चे भी पाकिस्तान के ही नागरिक हैं।
नागरिकता और पैसे का लालच: पाकिस्तान की यात्राओं के दौरान ही पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने उससे संपर्क साधा था। जफर को भारी आर्थिक प्रलोभन (पैसा) और पाकिस्तानी नागरिकता देने का वादा करके भारत के खिलाफ जासूसी की गतिविधियों के लिए तैयार किया गया था।
पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड: जफर को पहले भी जासूसी के एक अन्य मामले में ‘सरकारी गोपनीयता अधिनियम’ (Official Secrets Act) के तहत दोषी ठहराया जा चुका है।
भारतीय नंबरों के OTP पाकिस्तान भेजे, ऐसे रची जासूसी की साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार, जफर रियाज ने भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए तकनीकी रूप से भी पाकिस्तान की मदद की। आरोपी ने एक पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी को भारतीय मोबाइल नंबरों के ‘वन-टाइम पासवर्ड’ (OTPs) उपलब्ध कराए थे।
क्यों भेजे गए थे OTP?
इन ओटीपी (OTP) की मदद से पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी ने पाकिस्तान में बैठे-बैठे ही भारतीय नंबरों पर 'वॉट्सऐप अकाउंट' एक्टिवेट (चालू) कर लिए थे। इन फेक अकाउंट्स का इस्तेमाल भारतीय सेना और सुरक्षा से जुड़े लोगों को जाल में फंसाने और जानकारी जुटाने के लिए किया जा रहा था।
'मोतीराम जाट' के साथ मिलकर चला रहा था रैकेट
एनआईए के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी ने जफर द्वारा एक्टिवेट कराए गए इन वॉट्सऐप अकाउंट्स का इस्तेमाल करके 'मोतीराम जाट' नाम के एक अन्य व्यक्ति से गुपचुप तरीके से बातचीत की थी। मोतीराम जाट भी इस मामले में सह-आरोपी है और वह भी भारतीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां और दस्तावेज पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचाने के काम में लिप्त था।
UAPA और कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज
एनआईए ने आरोपी जफर रियाज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), ‘सरकारी गोपनीयता अधिनियम’ (Official Secrets Act) और आतंकवाद विरोधी कानून 'UAPA' की अलग-अलग गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। केंद्रीय एजेंसी अब इस जासूसी रैकेट में शामिल अन्य सफेदपोशों और देश के भीतर छिपे मददगारों का पता लगाने के लिए कड़ाई से पूछताछ कर रही है, ताकि इस बड़ी देशविरोधी साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।