जाति पर छिड़ी सियासी रार: सपा सांसद वीरेंद्र सिंह के बयान पर भड़की भाजपा, जुबानी जंग तेज

चंदौली से महोबा तक सपा सांसदों के 'विवादित बोल'; पीएम मोदी पर टिप्पणी को लेकर भाजपा हमलावर, कानूनी कार्रवाई की तैयारी!

21 May 2026  |  115

 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानों की तपिश अपने चरम पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के दो सांसदों द्वारा दिए गए बयानों ने राज्य में एक बड़ा सियासी बवंडर खड़ा कर दिया है। चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और महोबा (हमीरपुर) से सांसद अजेंद्र सिंह लोधी की टिप्पणियों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए तीखी नाराजगी व्यक्त की है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने एक सार्वजनिक मंच या मीडिया से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जातिगत पृष्ठभूमि को लेकर एक टिप्पणी की। उनके इस बयान का वीडियो जैसे ही सामने आया, उसने एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया। भाजपा ने इस बयान को न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ बताया है, बल्कि इसे पिछड़े समाज का अपमान भी करार दिया है।

मुख्य विवाद: क्या कहा सांसदों ने?

1. वीरेंद्र सिंह (सांसद, चंदौली):

सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जातिगत पृष्ठभूमि को लेकर एक बेहद विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि पीएम मोदी की वास्तविक जाति को लेकर जनता के बीच असमंजस की स्थिति है। उनके इस बयान ने सीधे तौर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया।

2. अजेंद्र सिंह लोधी (सांसद, महोबा-हमीरपुर):

विवाद यहीं नहीं थमा; इसी दौरान महोबा से सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी द्वारा भी प्रधानमंत्री मोदी पर कथित रूप से बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला सामने आया। इस टिप्पणी के बाद से ही भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं में भारी आक्रोश है।

सीएम योगी आदित्यनाथ का कड़ा रुख, कानूनी कार्रवाई की मांग

सपा सांसदों की इस बयानबाजी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने इसे देश के सर्वोच्च पद और पिछड़े समाज का अपमान बताते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इन बयानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

"प्रधानमंत्री देश के गौरव हैं। उनके खिलाफ इस तरह की अमर्यादित और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल विपक्ष की हताशा और संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।"

भाजपा खेमे से आधिकारिक प्रतिक्रिया

भाजपा का पलटवार: "यह सपा की सोची-समझी राजनीति"

इस दोहरे विवाद के बाद भाजपा नेताओं ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया है। भाजपा का आरोप है कि यह किसी एक नेता की निजी टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह समाजवादी पार्टी की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत समाज में विभाजन और वैमनस्य फैलाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश में आगामी दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। भाजपा जहां इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर संसद तक सपा को घेरने की रणनीति बना रही है, वहीं सपा इस पर बैकफुट पर नजर आ रही है।

सांसद वीरेंद्र सिंह के बयान पर उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि समाजवादी पार्टी के पास जनता के बीच जाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए उनके नेता अब व्यक्तिगत टिप्पणियों और जातिगत राजनीति पर उतर आए हैं।

"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की लोकप्रियता से घबराकर समाजवादी पार्टी के नेता अपनी मर्यादा भूल चुके हैं। देश के प्रधानमंत्री की जाति पर टिप्पणी करना विपक्ष की हताशा और संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। जनता इस तरह की राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगी।"

भाजपा प्रवक्ता

बैकफुट पर सपा या नई रणनीति?

इस विवाद पर समाजवादी पार्टी के कुछ हलकों से सफाई भी सामने आ रही है, वहीं कुछ नेता इस मुद्दे पर खुलकर बात करने से बच रहे हैं। हालांकि, सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी हमेशा से ही देश में जातीय जनगणना और समाज के पिछड़े वर्गों के हक की बात करती रही है, लेकिन नेताओं को बयानों में शालीनता बरतनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए दोनों ही दल इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं। भाजपा जहां इसे 'पिछड़ा वर्ग विरोधी' कार्ड के रूप में भुनाने की कोशिश करेगी, वहीं सपा इसे अपनी 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति के इर्द-गिर्द बनाए रखने का प्रयास कर सकती है।

बढ़ सकती हैं मुश्किलें

इस विवादास्पद बयान के बाद चंदौली समेत पूरे उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा देखने को मिल सकता है, क्योंकि भाजपा इस मामले को लेकर हमलावर रुख अपनाए हुए है।

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