अमेरिकी टेक सेक्टर में हाहाकार: एआई और छंटनी की मार से संकट में हजारों भारतीय, 'H-1B' वीजा धारकों पर देश छोड़ने की तलवार

मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियों में नौकरियां खत्म होने से 'अमेरिकन ड्रीम' को लगा झटका; सिर्फ 60 दिनों में नई नौकरी ढूंढने की चुनौती, भारत लौटने को मजबूर हो रहे पेशेवर।‌

21 May 2026  |  97

 

सिलिकॉन वैली/नई दिल्ली: अमेरिका के टेक सेक्टर में आई छंटनी की एक और नई लहर ने वहां रह रहे हजारों भारतीय इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की जिंदगी में उथल-पुथल मचा दी है। मेटा, अमेजन और लिंक्डइन जैसी दिग्गज कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म की जा रही हैं। भारतीय पेशेवरों के लिए नौकरी जाने का मतलब सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि अमेरिका छोड़ने का कानूनी काउंटडाउन शुरू होना है, जिससे वर्षों से वहां बसे परिवारों का भविष्य दांव पर लग गया है।

H-1B वीजा धारकों पर मंडराया संकट: क्या है 60 दिनों का नियम?

अमेरिका में काम करने वाले अधिकांश भारतीय टेक पेशेवर H-1B वीजा पर हैं, जो सीधे उनकी नियोक्ता (Employer) कंपनी से जुड़ा होता है। नौकरी जाने के बाद इन पेशेवरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की होती है।

क्रूर टाइमलाइन:

यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के नियमों के अनुसार, नौकरी से निकाले गए H-1B कर्मचारियों को केवल 60 दिनों का ग्रेस पीरियड (या जब तक उनका I-94 स्टेटस वैध है, जो भी पहले हो) मिलता है। यह समय कर्मचारी के आखिरी वर्किंग डे से शुरू होता है। इस सीमित अवधि में उन्हें वीजा ट्रांसफर के लिए नया जॉब स्पॉन्सर ढूंढना होता है, अन्यथा उन्हें कानूनी रूप से अमेरिका छोड़ना पड़ता है।

तकनीकी मंदी और धीमी हायरिंग के कारण यह दो महीने का समय बहुत जल्दी बीत जाता है। कुछ लोग समय बढ़ाने के लिए B-2 टूरिस्ट वीजा में स्विच करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी अधिकारी अब ऐसे आवेदनों की बेहद बारीकी से जांच कर रहे हैं।

आंकड़ों में तबाही: सिलिकॉन वैली में 1.10 लाख से अधिक नौकरियां खत्म

स्टार्टअप और टेक सेक्टर के छंटनी डेटा को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Layoffs.fyi के अनुसार, इस साल अब तक टेक इंडस्ट्री में 1,10,000 से अधिक कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। इसमें एक बहुत बड़ा हिस्सा भारतीय पेशेवरों का है। वित्तीय वर्ष 2025 के अमेरिकी सरकारी आंकड़े भी गवाही देते हैं कि स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक थी।

यद्यपि मेटा जैसी कंपनियां प्रभावित कर्मचारियों को 16 सप्ताह का मूल वेतन, अनुभव के आधार पर अतिरिक्त पैकेज और 18 महीने का हेल्थकेयर कवरेज जैसी वित्तीय मदद दे रही हैं; लेकिन वीजा की अनिश्चितता के कारण परिवारों को भारी मानसिक और भावनात्मक तनाव से गुजरना पड़ रहा है। होम लोन, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े फैसले अचानक अधर में लटक गए हैं।

बदल रहा है 'अमेरिकन ड्रीम' का नजरिया, भारत वापसी की तैयारी

दशकों तक भारतीय इंजीनियरों के लिए अमेरिका जाने का मतलब करियर की शानदार ग्रोथ और ग्लोबल एक्सपोजर हुआ करता था। लेकिन बार-बार होने वाली छंटनी और सख्त होते वीजा नियमों ने कई पेशेवरों को अपना भविष्य दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है।

हालिया 'ब्लाइंड पोल' (Blind Poll) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में रहने वाले लगभग आधे भारतीय पेशेवर नौकरी जाने की स्थिति में अब भारत लौटने को तैयार हैं। वहीं, कुछ पेशेवर विकल्प के तौर पर कनाडा या यूरोप का रुख कर रहे हैं।

खलनायक या जरूरत: छंटनी के पीछे एआई (AI) का बढ़ता प्रभाव

यह छंटनी ऐसे समय में हो रही है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी टेक इंडस्ट्री के हायरिंग पैटर्न को बदल रहा है। कंपनियां पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और रूटीन कोडिंग रोल्स को कम करके अपने संसाधनों को एआई और ऑटोमेशन की तरफ मोड़ रही हैं।

अकेले मेटा इस साल एआई से संबंधित निवेशों पर $100 बिलियन (लगभग 100 अरब डॉलर) से अधिक खर्च करने की योजना बना रही है। टेक कर्मचारियों के बीच अब यह डर गहरा गया है कि यह मंदी अस्थायी नहीं है, बल्कि तकनीक में आ रहे इस क्रांतिकारी बदलाव के कारण सामान्य सॉफ्टवेयर भूमिकाओं के लिए नौकरियां हमेशा के लिए कम हो सकती हैं।

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