सफलता या सोची-समझी पटकथा? चंडीगढ़ पुलिस के 'ऑपरेशन सेल' के एनकाउंटरों पर उठे गंभीर सवाल

खास 'फिक्स स्पॉट' और रात के समय हो रही मुठभेड़ों पर शहरवासियों ने जताई चिंता; पुलिस ने कहा— "सुरक्षा और गुप्त सूचनाओं के आधार पर होती है कार्रवाई।"

22 May 2026  |  107

 

चंडीगढ़। चंडीगढ़ पुलिस का 'ऑपरेशन सेल' इन दिनों शहर में गैंगस्टर्स और उनके गुर्गों के खिलाफ लगातार की जा रही मुठभेड़ों (Encounters) को लेकर सुर्खियों में है। पुलिस जहां इन कार्रवाइयों को संगठित अपराध और अवैध हथियारों की सप्लाई चेन के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इन एनकाउंटरों के खास 'पैटर्न' को लेकर शहर में अब सवाल भी उठने लगे हैं। लोग असमंजस में हैं कि ये मुठभेड़ें महज एक संयोग हैं या फिर किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा।

 चर्चा में हैं शहर के ये 'फिक्स स्पॉट'

मुठभेड़ों को लेकर सबसे बड़ा सवाल उनके स्थानों को लेकर उठ रहा है। आंकड़ों और घटनाओं पर गौर करें तो पुलिस की ज्यादातर मुठभेड़ें शहर के कुछ गिने-चुने और तय ठिकानों पर ही देखने को मिली हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

सुखना लेक टर्न और सेक्टर-26 का सरकारी ट्यूबवेल

सेक्टर-39 का जीरी मंडी चौक

सेक्टर-25 का रैली ग्राउंड

सेक्टर-43 बस स्टैंड के पीछे का सुनसान इलाका

 रात का वक्त और सीसीटीवी (CCTV) की कमी पर खड़े हुए सवाल

मुठभेड़ के पैटर्न पर सवाल उठाने वालों का तर्क है कि अधिकांश एनकाउंटर या तो देर रात होते हैं या फिर तड़के अलसुबह। इसके साथ ही एक बड़ी चिंता इन इलाकों में पारदर्शिता की कमी को लेकर है। चर्चा है कि जिन जगहों पर ये मुठभेड़ें हो रही हैं, वहां पर्याप्त सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते पुलिस और अपराधियों के बीच असल में क्या गतिविधि हुई, इसका कोई पुख्ता डिजिटल रिकॉर्ड सामने नहीं आ पाता।

शहरवासियों में दोहरा डर: एक तरफ जहां पुलिसिया कार्रवाई के तरीकों पर सवाल हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नागरिक इस बात से भी खौफजदा हैं कि गैंगस्टर्स के गुर्गे अत्याधुनिक हथियारों के साथ शहर में सरेआम घूम रहे हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं।

 पुलिस की दलील: "आम जनता की सुरक्षा के लिए रात का वक्त बेहतर"

इन उठते सवालों पर पुलिस अधिकारियों ने अपना रुख स्पष्ट किया है। पुलिस का कहना है कि यह कोई तय स्क्रिप्ट नहीं बल्कि रणनीतिक फैसले हैं:

लोकेशन और इनपुट: ये सभी ऑपरेशन पूरी तरह से सटीक गुप्त सूचनाओं और अपराधियों की लाइव लोकेशन के आधार पर किए जाते हैं।

कम आवाजाही: रात या अलसुबह के समय आम जनता की आवाजाही सड़कों पर न के बराबर होती है। ऐसे में गोलीबारी की स्थिति में आम नागरिकों की जान को कोई खतरा नहीं होता, इसलिए यह समय सबसे सुरक्षित माना जाता है।

भौगोलिक स्थिति: जिन स्थानों पर मुठभेड़ हुई हैं, उनके पास खाली मैदान, जंगल या कम आबादी वाले क्षेत्र हैं। अपराधी पुलिस को देखकर अक्सर इन्हीं रास्तों से भागने या छिपने की कोशिश करते हैं, जिसके चलते पुलिस को वहीं पर जवाबी कार्रवाई करनी पड़ती है।

 विशेषज्ञों की राय: 'स्मार्ट सर्विलांस' ही एकमात्र समाधान

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद और अविश्वास को खत्म करने का एकमात्र जरिया तकनीकी पारदर्शिता है। यदि इन संवेदनशील और सुनसान इलाकों में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम (निगरानी प्रणाली) को मजबूत किया जाए, तो अपराधियों पर नजर रखना भी आसान होगा और पुलिस की कार्रवाई पर भी कोई उंगली नहीं उठा सकेगा।

फिलहाल, ऑपरेशन सेल की इन बैक-टू-बैक कार्रवाइयों ने इतना तो साफ कर दिया है कि चंडीगढ़ पुलिस शहर में सक्रिय गैंग नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए पूरी तरह से 'हाई अलर्ट' पर है।

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