TRAI की रडार पर एयरटेल: पोस्टपेड ग्राहकों को 'स्पेशल 5G नेटवर्क' देने के दावे पर केंद्र सरकार सख्त, नेट न्यूट्रैलिटी की जांच शुरू

पोस्टपेड को प्राथमिकता से प्रीपेड ग्राहकों का नेटवर्क तो नहीं होगा धीमा? संचार मंत्रालय और ट्राई खंगाल रहे हैं 'नेटवर्क स्लाइसिंग' की तकनीक!

22 May 2026  |  124

 

नई दिल्ली: देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) की एक नई प्रीमियम सर्विस केंद्र सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के कड़े रुख के कारण विवादों में घिर गई है। एयरटेल ने हाल ही में अपने पोस्टपेड ग्राहकों को एक खास और बेहतर नेटवर्क अनुभव देने का दावा किया था, जो अब नियामकों की जांच के दायरे में है।

अधिकारी इस बात की गहनता से जांच कर रहे हैं कि क्या एयरटेल की यह नई सेवा 'नेट न्यूट्रैलिटी' (Net Neutrality - इंटरनेट निष्पक्षता) के नियमों का उल्लंघन करती है? सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पोस्टपेड (प्रीमियम) ग्राहकों को प्राथमिकता देने के चक्कर में देश के करोड़ों प्रीपेड ग्राहकों के नेटवर्क और इंटरनेट की क्वालिटी में कोई गिरावट न आए।

संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ली बैठक

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) पहले ही अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, रेगुलेटर 'ट्राई' इस सर्विस के तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करेगा और एयरटेल से इसके सभी टेक्निकल डेटा और कोड्स की मांग कर सकता है। एयरटेल को यह साबित करना होगा कि उसने अपने 5G नेटवर्क की स्लाइसिंग (बंटवारा) किस तरह की है, ताकि इस नई सर्विस के पीछे की असल तकनीक को समझा जा सके।

क्या है एयरटेल की 'नेटवर्क स्लाइसिंग' तकनीक और दावा?

एयरटेल ने पूरे भारत में रोल आउट किए जा रहे अपने 'स्टैंडअलोन 5G आर्किटेक्चर' (Standalone 5G Architecture) के तहत इस सेवा की घोषणा की थी।

कंपनी का दावा: एयरटेल का कहना है कि 5G नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी के जरिए वे नेटवर्क का एक हिस्सा पोस्टपेड यूजर्स के लिए आरक्षित कर रहे हैं, जिससे उन्हें ज्यादा कंसिस्टेंट (लगातार तेज) और बेहतर नेटवर्क स्पीड मिलेगी।

इंटरनल टेस्टिंग का तर्क: एयरटेल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हफ्तों चली उनकी आंतरिक टेस्टिंग में यह पाया गया है कि यह तकनीक सिर्फ पोस्टपेड ही नहीं, बल्कि प्रीपेड सहित सभी यूजर्स के ओवरऑल नेटवर्क एक्सपीरियंस को बेहतर बनाती है।

टारगेट ऑडियंस: एयरटेल की यह प्रायोरिटी (प्राथमिकता) सर्विस उसके कुल 373 मिलियन (37.3 करोड़) मोबाइल यूजर्स में से केवल 7.75 फीसदी पोस्टपेड ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

भारत में नियमों का 'ग्रे एरिया'

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह यह है कि भारत में अभी तक 'नेटवर्क स्लाइसिंग' (एक ही नेटवर्क को अलग-अलग स्पीड और प्राथमिकताओं में बांटना) को लेकर कोई विशिष्ट और कड़े नियम नहीं बने हैं।

अधूरी सिफारिशें: ट्राई (TRAI) ने सितंबर 2020 में टेलीकॉम नेटवर्क के लिए कुछ ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रैक्टिस (TMPs) की सिफारिश की थी, जिन्हें नेट न्यूट्रैलिटी के दायरे में लागू किया जा सकता था। हालांकि, दूरसंचार विभाग (DoT) ने अभी तक इन सिफारिशों को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित (Notify) नहीं किया है। इसी का फायदा उठाकर टेलीकॉम कंपनियां प्रीमियम सर्विस के नाम पर ज्यादा पैसे देने वाले ग्राहकों को बेहतर स्पीड का भरोसा दे रही हैं, जो अब सरकार की रडार पर है।

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