राजनयिक संबंधों को नया आयाम: 14 साल बाद अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता दौरा, 'मदर हाउस' से की भारत यात्रा की शुरुआत

चार दिवसीय उच्च-स्तरीय दौरे पर भारत पहुंचे मार्को रूबियो; ऊर्जा, रक्षा और क्वाड बैठक के जरिए चीन को घेरने और द्विपक्षीय तनाव दूर करने पर रहेगा मुख्य फोकस।

23 May 2026  |  59

 

कोलकाता/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार सुबह कोलकाता पहुंचे। पिछले 14 वर्षों में किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक की यह पहली कोलकाता यात्रा है। रूबियो के इस चार दिवसीय आधिकारिक भारत दौरे (23 से 26 मई) का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच हालिया तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना और क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूत करना है। इससे पहले, मई 2012 में हिलेरी क्लिंटन कोलकाता आने वाली आखिरी अमेरिकी विदेश मंत्री थीं।

सांस्कृतिक संदेश: मदर हाउस में टेरेसा को दी श्रद्धांजलि

कोलकाता हवाई अड्डे पर भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रूबियो का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके तुरंत बाद, रूबियो ने मध्य कोलकाता स्थित सेंट टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी के वैश्विक मुख्यालय 'मदर हाउस' और उससे जुड़े चिल्ड्रन्स होम का दौरा किया। उनकी इस यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।

सफरनामा: कोलकाता से लेकर दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात तक

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट साझा करते हुए इस यात्रा के आगामी पड़ावों की रूपरेखा बताई। रूबियो का यह दौरा कोलकाता से शुरू होकर आगरा, जयपुर और नई दिल्ली तक जाएगा।

सर्जियो गोर ने लिखा: "विदेश मंत्री मार्को रूबियो कोलकाता उतर चुके हैं। यह उनकी पहली भारत यात्रा है। आज हम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। अगले कुछ दिनों में व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा, क्वाड और कई अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी।"

ऊर्जा सुरक्षा: "जितना तेल-गैस चाहिए, अमेरिका देने को तैयार"

इस दौरे की सबसे बड़ी हाइलाइट दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर होने वाली डील है। मियामी से भारत रवाना होने से ठीक पहले रूबियो ने साफ कर दिया था कि अमेरिका में तेल और गैस का उत्पादन इस समय ऐतिहासिक ऊंचाई पर है, जिसका फायदा वह भारत को देना चाहता है।

असीमित आपूर्ति का वादा: रूबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को उतनी ऊर्जा (क्रूड ऑयल और गैस) की आपूर्ति करने के लिए तैयार है, जितनी नई दिल्ली खरीदना चाहती है।

वेनेजुएला विकल्प: अमेरिका भारत के विविध ऊर्जा विकल्पों में शामिल होना चाहता है, जिसमें वेनेजुएला के कच्चे तेल से जुड़ी सहयोगी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।

26 मई को दिल्ली में महामंथन: 'क्वाड' बैठक पर टिकीं दुनिया की नजरें

इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में होने वाली इस रणनीतिक बैठक में इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के तनाव पर गंभीर चर्चा होगी।

मुख्य भागीदार: बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी हिस्सा लेंगे।

एजेंडा: यह बैठक 1 जुलाई, 2025 को वाशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का निर्माण करना है।

वैश्विक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच मार्को रूबियो ने भारत को एक 'महान भागीदार' और मजबूत लोकतंत्र बताया है, जिससे साफ है कि यह दौरा आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया की भू-राजनीति की नई दिशा तय करेगा।

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