किसानों का फिर हल्लाबोल: केंद्र की MSP नीति, महंगे तेल और खाद संकट के खिलाफ 27 मई से देशव्यापी आंदोलन का एलान

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) खरीफ सीजन के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य को बताया 'फर्जी'; देश भर में जलाई जाएंगी सरकारी आदेश की कॉपियां।

23 May 2026  |  57

 

 

नई दिल्ली, 22 मई: देश के किसान एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। साल 2021-22 में दिल्ली की सीमाओं पर ऐतिहासिक किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले 'संयुक्त किसान मोर्चा' (SKM) ने शुक्रवार को एक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का एलान किया है। आगामी 27 मई से शुरू होने वाले इस आंदोलन के तहत देश भर के किसान संगठनों और कृषि मजदूरों को एकजुट होने का आह्वान किया गया है।

 सरकारी आदेश की कॉपियां जलाकर जताएंगे विरोध

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आयोजित एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जारी प्रेस नोट के अनुसार, किसान आंदोलन के पहले चरण में 27 मई को केंद्र सरकार के हालिया न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आदेश और 'कृषि लागत और मूल्य आयोग' (CACP) की रिपोर्ट की प्रतियों को सार्वजनिक रूप से जलाया जाएगा।

गौरतलब है कि CACP केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक विशेषज्ञ सलाहकार निकाय है, जो खरीफ और रबी सीजन की फसलों के लिए MSP की सिफारिश करता है।

 आंदोलन के केंद्र में हैं ये 3 बड़े मुद्दे:

'फर्जी' एमएसपी व्यवस्था: संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए जो एमएसपी ढांचा तैयार किया है, वह किसानों के साथ एक धोखा है और इसमें लागत के अनुसार सही मूल्य नहीं दिया गया है।

महंगा ईंधन और बढ़ती लागत: पिछले कुछ समय में डीजल और ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। एसकेएम ने इसे लेकर देश भर में तीखे प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

खाद संकट और कालाबाजारी: देश में खाद (Fertiliser) की बिगड़ती स्थिति, बढ़ती कीमतों और बाजार में जारी कथित कालाबाजारी पर सरकार की 'निष्क्रियता' को लेकर भी किसानों में भारी नाराजगी है।

 "किसानों पर चौतरफा मार" – SKM

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार एक तरफ तो किसानों को फसलों का सही दाम नहीं दे रही है, वहीं दूसरी तरफ डीजल और खाद जैसी बुनियादी जरूरतों को महंगा करके उन पर चौतरफा आर्थिक बोझ डाल रही है। खाद की किल्लत और कालाबाजारी ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है।

मोर्चा ने साफ कर दिया है कि 27 मई से शुरू हो रहा यह प्रदर्शन सिर्फ एक सांकेतिक शुरुआत है, यदि सरकार ने उनकी मांगों और चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया तो इस आंदोलन को आने वाले दिनों में और अधिक तेज तथा व्यापक किया जाएगा।

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