मुंबई। घरेलू बाजार में सोने की आसमान छूती कीमतों और सरकार द्वारा सीमा शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत किए जाने से आभूषण उद्योग को बड़ा झटका लगा है। विशेषज्ञों और रेटिंग एजेंसियों का अनुमान है कि इस दोहरी मार के कारण देश में सोने के आभूषणों की बिक्री घटकर एक दशक (10 साल) के निचले स्तर पर पहुंच सकती है। इस संकट का सबसे गंभीर असर छोटे और मध्यम आकार के क्षेत्रीय ज्वैलर्स पर पड़ने की आशंका है, जिनका मुनाफा और मार्जिन दोनों दांव पर लग गए हैं।
बड़ी कंपनियों का क्रेडिट स्थिर, छोटे ज्वैलर्स का कारोबार बंद होने की कगार पर
क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आयात शुल्क में बढ़ोतरी और उच्च कीमतों से मांग में भारी गिरावट आएगी।
संगठित व बड़े ब्रांड्स: हालांकि बड़े और ब्रांडेड ज्वैलर्स की बिक्री भी प्रभावित होगी, लेकिन मजबूत फाइनेंशियल बैकअप और बड़े क्रेडिट प्रोफाइल के कारण उनकी स्थिति स्थिर बनी रहने की संभावना है।
छोटे व मध्यम ज्वैलर्स: इनके पास फंडिंग के सीमित विकल्प होते हैं। बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) की कमी और मांग घटने से इनका क्रेडिट प्रोफाइल बेहद अस्थिर हो सकता है।
"छोटे ज्वैलर्स को सबसे अधिक नुकसान होगा क्योंकि उनके पास बड़ा फंड नहीं होता। वे अक्सर ऑर्डर के आधार पर ही स्टॉक रखते हैं। पहले से ही ऊंची कीमतों के कारण बाजार में क्रेडिट नहीं था, और अब ड्यूटी बढ़ने से कई छोटे विक्रेताओं का कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।"
— राष्ट्रीय प्रवक्ता, बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन
शादी का सीजन सहारा, लेकिन भविष्य की इन्वेंट्री की चिंता
कोठारी ब्रदर्स के महावीर कोठारी ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि बाजार में फिलहाल असमंजस की स्थिति है:
स्टॉक पर ब्रेक: फंडिंग की समस्या को देखते हुए कई छोटे सर्राफा व्यापारियों ने नए स्टॉक की खरीदारी फिलहाल रोक दी है।
जल्दबाजी का नुकसान: कुछ विक्रेताओं ने ड्यूटी बढ़ने के डर से जल्दबाजी में महंगा सोना खरीदकर स्टॉक तो कर लिया, लेकिन अब बाजार में मांग न के बराबर है।
जून तक ही राहत: फिलहाल जून तक शादियों का सीजन होने के कारण बड़े ज्वैलर्स के पास हलचल है और छोटे ज्वैलर्स भी पुराने ऑर्डर्स को पूरा करने में व्यस्त हैं, लेकिन सीजन खत्म होने के बाद भविष्य की इन्वेंट्री और सख्त नियमों को लेकर हर कोई चिंतित है।
मांग में 50 से 60 टन की भारी गिरावट का अनुमान
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है कि भारत में सोने की चमक इस साल फीकी रह सकती है।
| मुख्य बिंदु | अनुमानित प्रभाव |
|---|---|
| मांग में कमी | आयात शुल्क बढ़ने से भारत में सोने की मांग 50 से 60 टन तक गिर सकती है। |
| सालाना गिरावट | पिछले वर्ष की तुलना में मांग में लगभग 10 प्रतिशत की कमी आने की आशंका है। |
| अन्य कारक | आय स्तर में बदलाव, लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति (महंगाई) और मानसून का रुख भी मांग को प्रभावित करेगा। |
निष्कर्ष: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि आयात शुल्क में यह भारी वृद्धि अल्पावधि (Short-term) और दीर्घावधि (Long-term) दोनों में सोने की मांग को प्रभावित करेगी। हालांकि, आभूषणों और निवेश के लिए खरीदे जाने वाले सोने के सिक्कों पर इसका असर अलग-अलग तरह से देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, आने वाले दिन भारतीय सर्राफा बाजार के लिए कड़ी परीक्षा वाले होंगे।