ट्रंप का ईरान को दोटूक अल्टीमेटम: 'या तो अच्छा समझौता होगा या फिर पूरी तरह कर देंगे तबाह', दुनिया भर में कूटनीतिक हलचल तेज

अमेरिका और ईरान के बीच बड़े फैसले की घड़ी आई; इधर भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा एफडीआई (FDI) स्रोत बनकर उभरा अमेरिका, मॉरीशस को पछाड़ा।

24 May 2026  |  61

 

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी गतिरोध पर एक बेहद कड़े और बड़े फैसले का संकेत देकर दुनिया भर में सनसनी फैला दी है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सिओस' के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के हालिया प्रस्ताव पर गहन चर्चा कर रहे हैं और जल्द ही यह तय कर लेंगे कि कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना है या फिर सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनना है।

सीबीएस (CBS) के साथ एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि स्थिति इस समय '50-50' पर टिकी हुई है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "या तो हम एक अच्छा समझौता कर लेंगे या फिर उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देंगे।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दोनों देश एक ऐसे समझौते के बेहद करीब पहुंच रहे हैं, जो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगा और उसके संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को सुरक्षित रखने की गारंटी देगा।

ग्लोबल डिप्लोमेसी: सऊदी से लेकर पाकिस्तान तक फोन घुमाएंगे ट्रंप

ईरान के साथ इस संभावित फैसले को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई है। इस रणनीति के तहत राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही दुनिया के कई अहम देशों के नेताओं से फोन पर बात करने वाले हैं, जिनमें शामिल हैं:

सऊदी अरब, कतर और यूएई (UAE)

मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान

इसी बीच, नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया कि ईरान वार्ता पर बहुत जल्द कोई बड़ी खबर सामने आ सकती है। दूसरी ओर, ईरान ने भी एक 14-सूत्रीय समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देने की बात स्वीकार करते हुए अमेरिका के साथ संबंधों में सुधार की इच्छा जताई है, हालांकि कुछ पेचीदा बिंदुओं पर मतभेद अभी भी बरकरार हैं।

आर्थिक मोर्चे पर बड़ी खबर: भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा 'FDI किंग' बना अमेरिका

एक तरफ जहां अमेरिका वैश्विक कूटनीति का केंद्र बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ उसके आर्थिक रिश्ते एक नए शिखर पर पहुंच गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका अब भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है।

मॉरीशस को पछाड़ा, सिंगापुर अब भी टॉप पर

इस मामले में अमेरिका ने पारंपरिक रूप से आगे रहने वाले मॉरीशस को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, सिंगापुर अभी भी भारत में निवेश करने वाले देशों की सूची में शीर्ष (नंबर 1) पर बना हुआ है।

निवेश में बंपर उछाल: वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका से भारत में होने वाला इक्विटी निवेश दोगुना से भी ज्यादा होकर 11 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है।

सर्विसेज को पछाड़ 'कंप्यूटर सेक्टर' बना पसंदीदा विकल्प

भारत में विदेशी निवेश का रुख अब तेजी से बदल रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का क्षेत्र विदेशी निवेशकों की पहली पसंद रहा, जिसने पारंपरिक सेवा क्षेत्र (Service Sector) को भी पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में 'डेटा सेंटर्स' (Data Centers) के निर्माण में हो रहे भारी निवेश को इस बड़े उछाल की मुख्य वजह माना जा रहा है।

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