वैश्विक ऊर्जा संकट का साइड-इफेक्ट: भारत में और महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल, BPCL के डायरेक्टर ने दिए बड़ी बढ़ोतरी के संकेत

तेल बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव के बीच नीति निर्माताओं को दिए गए 3 विकल्प; रूस-अफ्रीका समेत 40 केंद्रों से आपूर्ति बढ़ाकर भारत ने चक्रव्यूह को भेदा।

24 May 2026  |  67

 

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर जारी गंभीर ऊर्जा संकट और कच्चे तेल के बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ने की आशंका गहरा गई है। देश की दिग्गज तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के एचआर डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि मौजूदा वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो भारत में ईंधन (फ्यूल) की खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी को शायद टाला न जा सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हुई 20% से 50% तक की बढ़ोतरी को शुरुआत में अस्थायी माना जा रहा था, लेकिन ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए भारी नुकसान को देखते हुए इसकी मरम्मत में लंबा वक्त लगेगा। ऐसे में भारत में तेल के दाम एक बार फिर बढ़ सकते हैं।

नीति निर्माताओं के सामने रखे तीन कड़े विकल्प

लगातार बढ़ते घाटे को देखते हुए बीपीसीएल के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने देश के नीति निर्माताओं के सामने इस संकट से निपटने के लिए तीन रास्ते सुझाए हैं:

पहला विकल्प: पेट्रोल पंपों पर सीधे खुदरा कीमतें बढ़ा दी जाएं (जिसका सीधा बोझ जनता पर पड़ेगा)।

दूसरा विकल्प: तेल कंपनियां (OMCs) खुद इस भारी नुकसान को झेलें, जिससे कंपनियों का घाटा और बढ़ेगा।

तीसरा विकल्प: सरकार आगे आए और इस घाटे की भरपाई के लिए तेल कंपनियों को अतिरिक्त वित्तीय फंड (Subsidy) जारी करे।

'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में संकट: रूस और अफ्रीका बने भारत के ढाल

वैश्विक सप्लाई चेन में आए व्यवधान पर बात करते हुए दुबे ने बताया कि इस समय 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में 20 लाख बैरल से अधिक तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो चुकी है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत में ईंधन की कोई किल्लत नहीं हुई है, जिसका पूरा श्रेय देश के कूटनीतिक प्रयासों और सप्लाई सोर्सेज में विविधता लाने को जाता है।

आपूर्ति केंद्रों में 100% का इजाफा: "भारतीय तेल कंपनियों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले हमारे पास कच्चे तेल की आपूर्ति के केवल 20 केंद्र थे। अब हमने इनकी संख्या को दोगुना कर 40 कर दिया है, जिसमें रूस और अफ्रीकी देश प्रमुखता से शामिल हैं। इन अलग-अलग सोर्सेज के कारण देश की ईंधन सुरक्षा मजबूत हुई है।" — राज कुमार दुबे, डायरेक्टर (HR), BPCL

संकट के बीच खपत में उछाल, ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ेंगे कदम

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और तनाव के बावजूद भारत में ईंधन की घरेलू खपत में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, बीपीसीएल का मानना है कि इस संकट से भारत को एक बड़ा फायदा भी होगा; इससे देश में ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) की ओर बढ़ने की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी।

भारत वर्तमान में 200 गीगावाट (GW) से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित कर चुका है। तेल आयात पर होने वाले भारी खर्च से विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए अब वैकल्पिक ईंधनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग और हाइड्रोजन हैं भविष्य के हथियार

कंपनी ने प्रधानमंत्री के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की सराहना की, जिसमें देश के कुल एनर्जी मिक्स में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी को मौजूदा 7-8% से बढ़ाकर 15% करना और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देना शामिल है।

20% इथेनॉल मिश्रण: दुबे ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण की पहल को 'गेम-चेंजर' बताया। उन्होंने कहा कि इसके बिना देश में पेट्रोल की 20% अधिक कमी हो जाती, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह दबाव में आ जाता।

सस्टेनेबल फ्यूचर: उन्होंने सोलर के साथ-साथ भविष्य के सबसे टिकाऊ ईंधन के रूप में हाइड्रोजन पर चल रहे शोध और प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

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