टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ी राहत की तैयारी: कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने के करीब सरकार, मंत्रालयों में सहमति संभव

घरेलू बाजार में 45 लाख गांठ कपास की भारी किल्लत; लागत घटने से बढ़ेगा निर्यात, 4.5 करोड़ लोगों के रोजगार पर पड़ेगा सीधा सकारात्मक असर।

24 May 2026  |  41

 

नई दिल्ली। भारतीय कपड़ा और परिधान (गारमेंट और टेक्सटाइल) उद्योग के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार विदेशों से आयात किए जाने वाले कपास (Cotton) पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को पूरी तरह हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, इस विषय पर सरकार के भीतर बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही इस पर आधिकारिक मुहर लग सकती है। यह कदम कपड़ा उद्योग की उस लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगा, जो वैश्विक बाजार में भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए जरूरी है।

क्यों उठी आयात शुल्क हटाने की मांग? (मांग बनाम आपूर्ति का गणित)

इस समय देश का टेक्सटाइल उद्योग कच्चे माल यानी कपास की भारी किल्लत और उसकी आसमान छूती कीमतों से दो-चार हो रहा है। चालू सीजन के आंकड़े मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ी खाई को बयां करते हैं:

उद्योग की कुल जरूरत: लगभग 337 लाख गांठ कपास (नोट: कपास की एक गांठ = 170 किलोग्राम)

घरेलू घरेलू आवक (सीजन 2025-26): मात्र 292.15 लाख गांठ होने की संभावना

सप्लाई का बड़ा अंतर (गैप): घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बाजार में करीब 45 लाख गांठ कपास की कमी है।

इस कमी को पूरा करने का एकमात्र जरिया विदेशी कपास का आयात है। लेकिन वर्तमान में लगने वाली 11% ड्यूटी के कारण इंपोर्टेड कपास बेहद महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू गारमेंट फैक्ट्रियों की उत्पादन लागत (कॉस्ट) बढ़ जाती है और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछड़ जाती हैं।

मंत्रालयों के बीच अंतिम चरण में चर्चा

कपास से इंपोर्ट ड्यूटी हटाने का मामला फिलहाल तीन प्रमुख मंत्रालयों—वित्त, कपड़ा और कृषि मंत्रालय के बीच विचाराधीन है। शुरुआत में कपड़ा मंत्रालय और कृषि मंत्रालय की इस पर अलग-अलग राय थी, क्योंकि कृषि मंत्रालय को घरेलू किसानों के हितों की भी चिंता करनी होती है। हालांकि, मौजूदा संकट को देखते हुए अब तीनों मंत्रालयों के बीच आपसी तालमेल से रास्ता निकाला जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, चर्चा लगभग पूरी हो चुकी है और किसी भी वक्त ड्यूटी हटाने का बड़ा फैसला घोषित किया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति से भी गुहार लगा चुका है उद्योग

इस संकट के समाधान के लिए कपड़ा उद्योग के प्रतिनिधियों और प्रमुख निर्यातकों के एक उच्चस्तरीय दल ने हाल ही में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से भी मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विस्तार से अपनी समस्याओं को सामने रखा था और सरकार से कपास के आयात पर लगने वाले 11 प्रतिशत शुल्क को तुरंत हटाने की पुरजोर अपील की थी।

4.5 करोड़ लोगों के रोजगार का सवाल

कपड़ा उद्योग को मिलने वाली यह राहत देश की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।

PIB के आंकड़े: कृषि के बाद टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के करीब 4.5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े हैं।

ऐसे में कच्चे माल की कमी और महंगी लागत के कारण निर्यात में आ रही गिरावट पूरी घरेलू इंडस्ट्री के लिए खतरे की घंटी बनी हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार 11% आयात शुल्क हटा देती है, तो भारतीय कपड़ा मिलों को सही दाम पर कच्चा माल मिलेगा, जिससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा बल्कि लाखों नए रोजगार सुरक्षित और सृजित होंगे।

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