व्यापार के दो मजबूत स्तंभ: पारसी और गुजराती समुदायों ने लिखी भारत के औद्योगिक साम्राज्य की गाथा

दूरदर्शिता और जोखिम लेने के बेजोड़ हुनर से देश की अर्थव्यवस्था को शिखर पर ले गए पूनावाला, अंबानी और अदाणी जैसे दिग्गज कारोबारी।

24 May 2026  |  76

 

 

नई दिल्ली: भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास में देश के विभिन्न समुदायों का योगदान अतुलनीय रहा है, लेकिन जब बात व्यापारिक सूझबूझ, अटूट भरोसे और दूरदर्शिता की आती है, तो पारसी और गुजराती समुदाय का नाम सबसे ऊपर चमकता है। इन दोनों समुदायों ने न केवल देश के भीतर विशाल उद्योग खड़े किए, बल्कि वैश्विक मंच पर भी 'मेक इन इंडिया' की साख को बेहद मजबूत किया है।

जहाँ एक ओर पारसी कारोबारियों ने शुरुआती दौर में बैंकिंग, शिपिंग, स्टील और टेक्सटाइल जैसे बुनियादी क्षेत्रों में देश को आत्मनिर्भर बनाया; वहीं दूसरी ओर गुजराती उद्योगपतियों ने अपने अद्भुत व्यापारिक कौशल, जोखिम लेने की क्षमता और मजबूत नेटवर्क के दम पर कपड़ा, हीरा, केमिकल, फार्मा और रिटेल सेक्टर पर अपनी बादशाहत कायम की है। मेहनत, ईमानदारी और परिवार-आधारित मूल्य इन दोनों समुदायों की साझा पूंजी हैं।

आइए नजर डालते हैं देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले इन दोनों समुदायों के मौजूदा दिग्गजों और उनकी ताकत पर:

1. पारसी कारोबारी: कॉर्पोरेट जगत के पथप्रदर्शक

पारसी समुदाय ने हमेशा से मुनाफे के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण को प्राथमिकता दी है। इस समय इस समुदाय के प्रमुख चेहरे निम्नलिखित हैं:

सायरस और अदार पूनावाला (Serum Institute of India): भारत की वैक्सीन इंडस्ट्री के ये सबसे बड़े नाम हैं। इन्होंने सीरम इंस्टीट्यूट को दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी बनाया और कोविड काल में वैश्विक स्तर पर मानवता की रक्षा की। नेटवर्थ: 26.4 अरब डॉलर।

शापूर पी. मिस्त्री (Shapoorji Pallonji Group): इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के इस दिग्गज समूह ने भारत और विदेशों में कई ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स का निर्माण किया है। नेटवर्थ: 5.6 अरब डॉलर।

नोएल टाटा (Tata Group): 165 अरब डॉलर के सालाना रेवेन्यू वाले टाटा ग्रुप का प्रमुख चेहरा नोएल टाटा हैं, जिन्होंने 'ट्रेंट लिमिटेड' और 'टाटा इंटरनेशनल' के जरिए ग्रुप के रिटेल और उपभोक्ता बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

आदि और नादिर गोदरेज (Godrej Group): 129 साल पुराने इस सबसे सम्मानित कारोबारी परिवार ने उपभोक्ता उत्पादों से लेकर रियल एस्टेट और कृषि क्षेत्र तक अपना साम्राज्य फैलाया है। संयुक्त नेटवर्थ: 7.9 अरब डॉलर।

नुस्ली वाडिया (Wadia Group): वाडिया परिवार के मुखिया नुस्ली वाडिया ने 'बॉम्बे डाइंग' और 'ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज' जैसे आइकॉनिक ब्रांड्स को देश के घर-घर में स्थापित किया। नेटवर्थ: 5.1 अरब डॉलर।

2. गुजराती कारोबारी: व्यापारिक कौशल और असीमित विस्तार

गुजराती समुदाय अपने 'बिजनेस माइंडसेट' और बड़े फैसले लेने के साहस के लिए दुनिया भर में मशहूर है। समकालीन भारत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपति इसी माटी से आते हैं:

मुकेश अंबानी (Reliance Industries): एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पेट्रोकेमिकल, टेलीकॉम (जियो) और रिटेल सेक्टर में क्रांति लाकर भारतीय बाजार का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया है। नेटवर्थ: 91.9 अरब डॉलर।

गौतम अदाणी (Adani Group): एक साधारण शुरुआत से सफर शुरू कर गौतम अदाणी ने बंदरगाह, एयरपोर्ट, बिजली और ग्रीन एनर्जी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर साम्राज्य खड़ा किया है। नेटवर्थ: 81.7 अरब डॉलर।

दिलीप संघवी (Sun Pharmaceutical): महज 10,000 रुपये से शुरुआत करके दिलीप संघवी ने सन फार्मा को भारत की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी में तब्दील कर दिया। वे बेहद लो-प्रोफाइल लेकिन बेहद सफल उद्यमी हैं। नेटवर्थ: 26 अरब डॉलर।

उदय कोटक (Kotak Mahindra Bank): बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में विश्वसनीयता और स्थिरता का दूसरा नाम उदय कोटक हैं, जिन्होंने कोटक महिंद्रा बैंक को देश के शीर्ष निजी बैंकों में शुमार किया। नेटवर्थ: 12.9 अरब डॉलर।

पंकज पटेल (Zydus Lifesciences) एवं सुधीर मेहता (Torrent Group): पंकज पटेल ने जाइडस को रिसर्च और दवाओं के वैश्विक मंच पर स्थापित किया (नेटवर्थ: 8.8 अरब डॉलर), वहीं सुधीर मेहता के टॉरेंट समूह ने बिजली, गैस और हेल्थकेयर सेक्टर में गुजरात और देश में मजबूत पकड़ बनाई है (नेटवर्थ: 7.8 अरब डॉलर)

निष्कर्ष:

भारत को $5 ट्रिलियन (पाँच ट्रिलियन डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को पूरा करने में इन दोनों समुदायों की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। पारसियों की स्थापित विरासत और गुजरातियों की आधुनिक उद्यमशीलता का यह संगम भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय है।

 

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