अब पालतू जानवर भी करेंगे इंसानों से बात! चीनी स्टार्टअप ने पेश किया 'AI पेट ट्रांसलेटर कॉलर'

म्याऊं और भौंकने की आवाज को पलक झपकते ही शब्दों में बदल देगा यह गैजेट; 95% सटीकता का दावा, सोशल मीडिया पर छिड़ी दिलचस्प बहस।

24 May 2026  |  58

 

 

बीजिंग/नई दिल्ली: क्या आप कभी अपने पालतू कुत्ते या बिल्ली को देखकर यह सोचते हैं कि काश! यह बोल पाता? विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया ने अब इस कल्पना को हकीकत में बदलने का दावा किया है। चीन के एक इनोवेटिव टेक स्टार्टअप 'मेंग शियाओयी' (Meng Xiaoyi) ने दुनिया का पहला एआई-आधारित 'पेट ट्रांसलेटर कॉलर' (Pet Translator Collar) पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह अनोखा डिवाइस जानवरों की आवाज और उनके हावभाव को समझकर उसे इंसानी भाषा में ट्रांसलेट कर सकता है।

लॉन्चिंग की खबर आते ही टेक प्रेमियों और पेट लवर्स के बीच इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है, हालांकि सोशल मीडिया पर इसके दावों को लेकर सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं।

कैसे काम करता है यह जादुई AI कॉलर?

मेंग शियाओयी स्टार्टअप ने इस छोटे से गैजेट को बेहद उन्नत तकनीक से लैस किया है:

सेंसर और माइक्रोफोन: महज 27 ग्राम वजन के इस वायरलेस कॉलर में हाई-टेक माइक्रोफोन और मोशन सेंसर लगे हैं, जो पालतू जानवरों की आवाज, सांसों की गति और शारीरिक हरकतों को रिकॉर्ड करते हैं।

क्वेन एआई मॉडल (Qwen AI): यह डिवाइस अलीबाबा क्लाउड के प्रसिद्ध 'क्वेन एआई मॉडल' पर काम करता है। इस एआई को लाखों बिल्लियों और कुत्तों के वोकल सैंपल (आवाज के नमूनों) पर ट्रेन किया गया है।

95% सटीकता का दावा: कंपनी के अनुसार, यह कॉलर जानवरों के गुस्से, प्यार, भूख या बीमारी जैसे 20 से ज्यादा इमोशन्स (भावनाओं) को 95 प्रतिशत तक सटीक पहचान सकता है। एक वीडियो डेमो में बिल्ली की म्याऊं को "मुझे खेलना है" (I wanna play) और कुत्ते के भौंकने को "मुझे भूख लगी है" (I am hungry) में बदलते दिखाया गया है।

टू-वे कम्युनिकेशन: इंसान भी दे सकेंगे निर्देश

यह डिवाइस केवल जानवरों की बात समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टू-वे कम्युनिकेशन (द्विमार्गी संवाद) की सुविधा देता है। अब आपको अपने पेट को बुलाने के लिए "प्सप्सप्स" या अजीब आवाजें निकालने की जरूरत नहीं होगी। आप सामान्य भाषा में निर्देश देंगे, और यह कॉलर उसे ऐसी फ्रीक्वेंसी या आवाज में बदल देगा जिसे जानवर आसानी से समझ सकें।

सोशल मीडिया पर बंटी जनता: 'क्रांति या सिर्फ मार्केटिंग स्टंट?'

इस तकनीक ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां हजारों पेट लवर्स इसे भविष्य की सबसे शानदार खोज मान रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं:

एक्स (X) पर एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा— "95% सटीकता का दावा ऐसे किया जा रहा है जैसे पालतू जानवरों की अंग्रेजी या भाषा जांचने वाला कोई आधिकारिक बोर्ड मौजूद हो!"

वहीं एक अन्य यूजर का कहना था— "जानवर कुछ नहीं बोल रहे, बल्कि एआई खुद से ही मनगढ़ंत कहानियां और वाक्य बना रहा है।"

इसके बावजूद, बाजार में इसकी दीवानगी का आलम यह है कि ग्लोबल लॉन्च से पहले ही इस डिवाइस को 10,000 से ज्यादा प्री-ऑर्डर मिल चुके हैं।

कीमत और उपलब्धता

यह अनोखा एआई पेट कॉलर 30 मई से चीन के बाजारों में बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगा। इसकी शुरुआती कीमत 799 युआन (भारतीय मुद्रा में करीब 11,000 रुपये) रखी गई है। हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक किसी स्वतंत्र वैश्विक एजेंसी द्वारा इस तकनीक की जांच नहीं की जाती, तब तक इसके दावों पर पूरी तरह भरोसा करना जल्दबाजी होगी।

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