नई दिल्ली: भारतीय टेलीविजन इतिहास में जब भी सबसे लोकप्रिय और कालजयी धारावाहिकों की बात होती है, तो रामानंद सागर की 'रामायण' का नाम सबसे ऊपर आता है। 80 और 90 के दशक के इस ऐतिहासिक सीरियल ने न केवल टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि इसके कलाकारों को समाज में भगवान की तरह पूजा गया। इस शो में 'लक्ष्मण' का ओजस्वी किरदार निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी आज भी करोड़ों दिलों में बसे हुए हैं। अब सालों बाद, सुनील लहरी ने शो के दौरान मिलने वाली फीस और उस वक्त आई तकनीकी व भाषाई मुश्किलों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
"आज जैसी फीस नहीं, तब बस 'पीनट्स' मिलते थे"
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जब सुनील लहरी से 'रामायण' के लिए मिलने वाले पारिश्रमिक (फीस) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई तय रकम बताने के बजाय उस दौर की हकीकत बयां की। सुनील लहरी ने कहा:
"आज के समय में कलाकारों को काम के लिए करोड़ों रुपये मिलते हैं, लेकिन हमारे दौर में ऐसा बिल्कुल नहीं था। हमें लक्ष्मण के किरदार के लिए बहुत ही कम फीस मिलती थी, जिसे आप 'पीनट्स' (ऊंट के मुंह में जीरा) कह सकते हैं। हालांकि, उस वक्त आज की तरह इतना तामझाम और बेतहाशा खर्चे भी नहीं हुआ करते थे।"
शुद्ध हिंदी के डायलॉग्स और शूटिंग की चुनौतियाँ
फीस के अलावा सुनील लहरी ने शो की शूटिंग के दौरान आने वाली कड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में पौराणिक पात्रों की गरिमा बनाए रखने के लिए बेहद क्लिष्ट और शुद्ध हिंदी में संवाद (डायलॉग्स) बोलने होते थे।
इन भारी-भरकम संवादों को बिना किसी गलती के और सही थ्रो के साथ बोलने के लिए कलाकारों को कई-कई घंटों तक बार-बार कठिन प्रैक्टिस करनी पड़ती थी। इसके अलावा उस समय आज की तरह आधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की सुविधाएं न होने के कारण भी शूटिंग करना बेहद मुश्किल भरा काम था।
असल जिंदगी में मिलने लगा था 'भगवान' का दर्जा
रामानंद सागर की रामायण पहली बार वर्ष 1987 से 1988 के बीच प्रसारित हुई थी। कोरोना काल में जब इसे दूरदर्शन पर दोबारा टेलीकास्ट किया गया, तो नई पीढ़ी भी इसकी दीवानी हो गई।
सुनील लहरी ने कई बॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया, लेकिन जो अमर पहचान उन्हें 'लक्ष्मण' के रूप में मिली, वह बेजोड़ है। शो की लोकप्रियता का आलम यह था कि अरुण गोविल (राम), दीपिका चिखलिया (सीता) और सुनील लहरी जैसे कलाकार जब भी जनता के बीच जाते थे, तो लोग सचमुच उन्हें भगवान मानकर उनके पैर छूने लगते थे और आशीर्वाद लेते थे। अरविंद त्रिवेदी (रावण) और दारा सिंह (हनुमान) जैसे कलाकारों ने भी इस शो को भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य हिस्सा बना दिया।