सपा और रालोद में कभी हाँ, कभी ना !
रालोद के साथ हुआ गठबंधन तो सपा को क्या होगा फायदा?
30 May 2016
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रविवार को दिल्ली में शिवपाल से मुलाकात के बाद चौधरी अजित सिंह सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके आवास गए. राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया के बीच इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा था. पर जल्दी ही ये स्पष्ट हो गया की सपा अजित सिंह को राज्य सभा नहीं भेज रही है.अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी पश्चिमी यूपी की ताकत राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन करती है और सपा का मुस्लिम और रालोद के जाट वोटरों का गठजोड़ बनता है तो वेस्ट यूपी की 145 विधानसभा सीटों पर भाजपा और बसपा के लिए तगड़ी चुनौती होगी।
इससे चुनाव में दोनों पार्टियों में गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, अजित सिंह ने गठजोड़ की बात से इनकार किया है। इससे पहले रालोद की जदयू के साथ विलय और भाजपा के साथ गठबंधन पर बातचीत हुई थी, पर बात नहीं बन पाई। ऐसे में रालोद बहुत फूंक-फूंक कर आगे बढ़ रहा है।अजित सिंह के करीबी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन को लेकर शुरुआती बातचीत हुई है। दोनों दल अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। सपा पश्चिमी यूपी में पकड़ मजबूत करने के लिए अजित सिंह को राज्यसभा भेजने पर विचार कर सकती है। हालांकि सपा सभी राज्यसभा सीट के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुकी है। अजित सिंह को राज्यसभा भेजने के लिए सपा को एक उम्मीदवार वापस लेना होगा।
सपा के रणनीतिकार मानते हैं कि रालोद सहित कई दूसरी छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन कर अगले साल विधानसभा चुनाव में सरकार विरोधी माहौल से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकती है। क्योंकि, पिछले दो चुनावों में सपा और बसपा के बीच करीब चार फीसदी वोट के अंतर पर हार जीत हुई है, जबकि रालोद करीब तीन फीसदी वोट हासिल करने में सफल रहा है।
इससे चुनाव में दोनों पार्टियों में गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, अजित सिंह ने गठजोड़ की बात से इनकार किया है। इससे पहले रालोद की जदयू के साथ विलय और भाजपा के साथ गठबंधन पर बातचीत हुई थी, पर बात नहीं बन पाई। ऐसे में रालोद बहुत फूंक-फूंक कर आगे बढ़ रहा है।अजित सिंह के करीबी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन को लेकर शुरुआती बातचीत हुई है। दोनों दल अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। सपा पश्चिमी यूपी में पकड़ मजबूत करने के लिए अजित सिंह को राज्यसभा भेजने पर विचार कर सकती है। हालांकि सपा सभी राज्यसभा सीट के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुकी है। अजित सिंह को राज्यसभा भेजने के लिए सपा को एक उम्मीदवार वापस लेना होगा।
सपा के रणनीतिकार मानते हैं कि रालोद सहित कई दूसरी छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन कर अगले साल विधानसभा चुनाव में सरकार विरोधी माहौल से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकती है। क्योंकि, पिछले दो चुनावों में सपा और बसपा के बीच करीब चार फीसदी वोट के अंतर पर हार जीत हुई है, जबकि रालोद करीब तीन फीसदी वोट हासिल करने में सफल रहा है।