घाटी में आतंक के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: श्रीनगर और शोपियां में NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी, जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख का घर भी खंगाला

अवैध घोषित 'दारुल उलूम सिराजुल उलूम' और संदिग्ध ठिकानों पर एनआईए की रेड; युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और टेरर फंडिंग की रीढ़ तोड़ने की बड़ी मुहिम।

25 May 2026  |  58

 

 

श्रीनगर/जम्मू-कश्मीर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार (25 मई) को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और देश विरोधी ताकतों के खिलाफ एक बार फिर बड़ा प्रहार किया है। एनआईए की टीमों ने कश्मीर घाटी के श्रीनगर और शोपियां जिलों में कई संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह त्वरित कार्रवाई टेरर फंडिंग, ओवरग्राउंड वर्करों (OGWs) के नेटवर्क को ध्वस्त करने और स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने वाली साजिशों का पर्दाफाश करने के लिए की गई है।

खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में एनआईए को स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) का कड़ा सुरक्षा सहयोग मिला, जिससे घाटी के दक्षिण हिस्सों सहित सभी चिह्नित ठिकानों पर एक साथ घेराबंदी की जा सकी।

अवैध संस्थान और 'जमात' के पूर्व प्रमुख पर शिकंजा

सोमवार तड़के शुरू हुई इस छापेमारी में जांच एजेंसी के रडार पर मुख्य रूप से दो बड़े नाम रहे:

दारुल उलूम सिराजुल उलूम (शोपियां): शोपियां के इमाम साहिब इलाके में स्थित इस शिक्षण संस्थान में एनआईए ने सघन तलाशी अभियान चलाया। सैकड़ों छात्रों को धार्मिक और औपचारिक शिक्षा देने वाले इस संस्थान को पिछले ही महीने प्रशासन द्वारा 'अवैध संस्था' घोषित किया गया था।

शहज़ादा औरंगज़ेब का आवास: प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) के पूर्व प्रमुख शहज़ादा औरंगज़ेब के आवास पर भी एनआईए की टीमों ने घंटों तलाशी ली और कई अहम दस्तावेज खंगाले।

क्यों हो रही है यह कार्रवाई? सुरक्षा एजेंसियों का आरोप है कि घाटी में कुछ तथाकथित शैक्षणिक संस्थान और संदिग्ध लोग पर्दे के पीछे से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की जमीन तैयार कर रहे थे। इनका उद्देश्य प्रतिबंधित संगठनों के राष्ट्रविरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाना और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाना था। छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जब्त की गई है।

टाइमलाइन: जम्मू-कश्मीर में बीते 15 महीनों में NIA के बड़े एक्शन

घाटी से आतंकवाद के इकोसिस्टम को जड़ से उखाड़ने के लिए एनआईए लगातार सक्रिय है। पिछले कुछ समय में हुई प्रमुख कार्रवाइयों पर एक नजर:

समयकार्रवाई का मुख्य केंद्रकिस पर हुआ प्रहार?
मार्च 2025जम्मू क्षेत्र (12 ठिकाने)लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का घुसपैठ नेटवर्क।
जून 2025श्रीनगर, पुलवामा, बारामूला (32 ठिकाने)टेरर फंडिंग और ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के खिलाफ बड़ी रेड।
सितंबर 2025जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्य (22 ठिकाने)संदिग्ध फंडिंग नेटवर्क और आतंकी मॉड्यूल की कड़ियां जोड़ी गईं।
जनवरी 2026शोपियां और अनंतनागआतंकियों के स्थानीय मददगारों और संदिग्धों से पूछताछ।
अप्रैल 2026श्रीनगर और बारामूलाआतंकी साजिश और युवाओं को भड़काने वाले कट्टरपंथी नेटवर्क पर चोट।

 

जमात-ए-इस्लामी पर क्यों बढ़ा शिकंजा?

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी (JeI) जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद, उग्रवाद और भारत-विरोधी प्रचार को लगातार हवा दे रहा है। यह संगठन देश की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

5 साल के लिए बढ़ा बैन: केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत इस संगठन पर लगे प्रतिबंध को अगले 5 वर्षों के लिए और बढ़ा दिया है।

इतिहास: इस संगठन को सबसे पहले पुलवामा हमले के बाद 28 फरवरी 2019 को 'गैर-कानूनी संगठन' घोषित किया गया था। गृह मंत्रालय की जांच में पाया गया कि यह संगठन सीधे तौर पर आतंकी संगठनों के संपर्क में है और कश्मीर को भारत से अलग करने की हिंसक मांग करने वाले अलगाववादी समूहों की मदद कर रहा है।

अब आगे क्या? एनआईए सोमवार की छापेमारी में जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

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