NEET-UG पेपर लीक में बड़ा खुलासा: पुणे की प्रिंसिपल ने चंद रुपयों के लिए लीक किए थे फिजिक्स के सवाल, CBI का कोर्ट में दावा

मराठी अनुवाद पैनल की सदस्य थीं प्रिंसिपल मनीषा हवलदार; बॉटनी टीचर के साथ मिलकर छात्रों को भेजे थे हाथ से लिखे नोट्स, आज दिल्ली की अदालत में पेशी।

25 May 2026  |  95

 

 

पुणे/नई दिल्ली। नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। सीबीआई ने बताया कि इस महा-घोटाले की कड़ी में गिरफ्तार पुणे के एक नामी स्कूल की प्रिंसिपल मनीषा संजय हवलदार ने महज कुछ हजार रुपयों के लालच में छात्रों के साथ परीक्षा से संबंधित फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) के प्रश्न और गोपनीय सामग्री साझा की थी।

सीबीआई ने शुक्रवार को हवलदार को गिरफ्तार किया था और उसे पेपर लीक मामले का एक और मुख्य 'सोर्स' (स्रोत) बताया है। आरोपी महिला को पुणे की अदालत में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है, और सोमवार को उसे दिल्ली की विशेष अदालत में पेश किए जाने की पूरी संभावना है।

अनुवाद पैनल में थीं शामिल, ऐसे रची साजिश

पुणे के सेठ हीरालाल सर्राफ प्रशाला (स्कूल) की प्रिंसिपल मनीषा हवलदार कोई साधारण शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि उन पर परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी थी।

मराठी अनुवाद पैनल की सदस्य: मनीषा हवलदार नीट यूजी के लिए फिजिक्स प्रश्नपत्र के उस आधिकारिक पैनल की सदस्य थीं, जिसे पेपर का मराठी भाषा में अनुवाद करने का काम सौंपा गया था।

बनाए थे हाथ से लिखे नोट्स: पैनल में रहने के दौरान ही उन्होंने प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग की। सूत्रों के मुताबिक, हवलदार ने प्रश्नपत्र से जुड़े सवालों के हाथ से लिखे (Handwritten) नोट्स तैयार किए।

बॉटनी टीचर के साथ मिलकर की डील: सीबीआई ने अदालत को बताया कि हवलदार ने अपने ही स्कूल की बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) की शिक्षिका मनीषा मंढारे के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया और पैसों के बदले इन गुप्त नोट्स को कुछ चुनिंदा छात्रों तक पहुंचा दिया।

चंद रुपयों के लिए दांव पर लगाया लाखों का भविष्य

जांच एजेंसी के दावों ने इस बात पर सबको हैरान कर दिया है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक का पेपर कितनी मामूली रकम के लिए लीक कर दिया गया:

डील का विवरण: सीबीआई के आरोपों के मुताबिक, प्रिंसिपल मनीषा हवलदार ने पेपर से जुड़े सवाल साझा करने के बदले एक छात्र से 20,000 रुपये और दूसरे छात्र से महज 25,000 रुपये की वसूली की थी।

अब आगे क्या?

सीबीआई अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इन दोनों शिक्षिकाओं ने सिर्फ दो छात्रों से ही पैसे लिए थे या यह नेटवर्क और बड़ा है। दिल्ली की अदालत में पेशी के बाद सीबीआई हवलदार की कस्टडी की मांग करेगी, ताकि पेपर लीक के इस पूरे 'पुणे मॉड्यूल' का भंडाफोड़ किया जा सके और मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।

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