ऐतिहासिक समझौता! परमाणु संकट पर झुके अमेरिका-ईरान; बिना टैक्स खुलेगा 'होर्मुज', जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

'होर्मुज', जानें पूरी इनसाइड स्टोरी डोनाल्ड ट्रंप और मुज्तबा खामेनेई करेंगे अंतरिम डील पर दस्तखत; दुनिया के सबसे बड़े तेल मार्ग को पूरी तरह बहाल होने में लग सकते हैं 30 दिन से 6 महीने, ये हैं 4 बड़े कारण।

25 May 2026  |  48

 

वॉशिंगटन/तेहरान। वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से जारी भीषण सैन्य गतिरोध के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच 'परमाणु कार्यक्रम' को लेकर एक अंतरिम समझौते (Interim Agreement) पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। अमेरिकी मीडिया चैनल 'सीएनएन' (CNN) के मुताबिक, इस डील का फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

इस ऐतिहासिक समझौते पर अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान की तरफ से वहां के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस डील की सबसे बड़ी शर्त दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को बिना किसी टोल (टैक्स) के पूरी तरह खोलना है।

क्या है अमेरिका-ईरान के बीच हुआ 'अंतरिम समझौता'?

इस महा-समझौते के तहत दोनों देशों ने 'लो-एंड-टेक' (Give and Take) की नीति अपनाई है:

ईरान की प्रतिबद्धता: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और व्यापार के लिए होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देगा।

अमेरिका की प्रतिबद्धता: अमेरिका अब ईरान पर सैन्य हमला नहीं करेगा और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जब्त पड़े ईरान के अरबों रुपये वापस लौटाएगा।

लेबनान संकट का अंत: इस डील में विशेष रूप से उल्लेख है कि लेबनान पर भी अब कोई हमला नहीं होगा, जिससे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध पर पूरी तरह विराम लग जाएगा।

समझौता तो हुआ, लेकिन होर्मुज को पूरी तरह खुलने में क्यों लगेगा समय?

होर्मुज फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार है, जो महज 34 किलोमीटर संकरा है और जहां से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है। युद्ध के दौरान ईरान ने 3 द्वीपों के जरिए इसे पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था। हालांकि अब इसे खोला जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों और पेंटागन के मुताबिक इसे पूरी तरह सामान्य होने में 30 दिन से लेकर 6 महीने तक का समय लग सकता है। इसके पीछे 4 मुख्य कारण हैं:

1. पानी के नीचे बिछीं 12 विध्वंसक बारूदी सुरंगें (Mines)

ईरान ने अमेरिकी हमले के डर से होर्मुज के पानी के नीचे 12 बेहद खतरनाक और विध्वंसक बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं। रास्ते को सुरक्षित करने के लिए सबसे पहले इन्हें हटाना होगा। ईरान यह काम खुद करना चाहता है और उसका कहना है कि सुप्रीम लीडर के आदेश के बाद इन माइंस को हटाने में कम से कम 30 दिन का समय लगेगा।

2. दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास

'हाई फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक्स' के मुख्य अर्थशास्त्री कार्ल वीनबर्ग के अनुसार, इस काम के लिए कोई सटीक तारीख तय करना मुश्किल है। ईरान अभी भी अमेरिका को भरोसेमंद नहीं मानता है। समझौते के बावजूद ईरान को अमेरिकी हमले का डर रहेगा, इसलिए माइंस हटाने की प्रक्रिया शुरू करने में ही एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग सकता है।

3. फारस की खाड़ी में फंसे 2,000 मालवाहक जहाज

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, इस समय फारस की खाड़ी में विभिन्न देशों के करीब 2,000 कमर्शियल जहाज और तेल टैंकर फंसे हुए हैं। इन जहाजों को वहां से निकालना एक बड़ी चुनौती है। जब तक वैश्विक शिपिंग कंपनियों को यह 100% विश्वास नहीं हो जाता कि होर्मुज अब पूरी तरह सुरक्षित है, तब तक वे अपने जहाजों को आगे नहीं बढ़ाएंगी।

4. बड़े जहाजों के लिए 6 महीने का अल्टीमेटम

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के अधिकारी संसद में पेश हुए थे। पेंटागन का आकलन है कि समझौते के बाद छोटे टैंकर तो जल्द ही इस रास्ते से निकल जाएंगे, लेकिन बहुत बड़े आकार के मालवाहक जहाजों (VLCCs) को इस संकरे रास्ते से सुरक्षित बाहर निकलने और रूट को सामान्य होने में कम से कम 6 महीने का वक्त लग सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट: एक नजर में

विशेषताविवरण
भौगोलिक स्थितिफारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच (चौड़ाई: मात्र 34 किमी)।
वैश्विक महत्वदुनिया की कुल तेल-गैस आपूर्ति का लगभग 20% इसी रास्ते से होता है।
वर्तमान स्थितिअमेरिकी हमले के बाद ईरान ने किया था ब्लॉक, अब अंतरिम समझौते के बाद बिना टोल के खुलेगा।

 

वैश्विक बाजारों पर असर

इस समझौते की खबर मात्र से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज होने की उम्मीद है। यदि होर्मुज बिना किसी अड़चन के खुल जाता है, तो वैश्विक स्तर पर छाई मंदी और महंगाई के बादलों का छटना तय माना जा रहा है।

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