नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। ईंधन के इस 'शॉक' का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों पर ही नहीं, बल्कि हर आम घर के बजट पर दिखने लगा है। प्रमुख कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LocalCircles के एक ताजा और व्यापक राष्ट्रीय सर्वे में बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
सर्वे के मुताबिक, ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट (माल ढुलाई) बढ़ने के कारण खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की सेवाओं के दाम बढ़ गए हैं, जिससे निपटने के लिए अब भारतीय ग्राहकों ने अपने खर्च करने के तरीकों को बदलना शुरू कर दिया है।
LocalCircles सर्वे का दायरा: देश की नब्ज
इस सर्वे के नतीजे बेहद प्रामाणिक हैं क्योंकि इसमें भारत के 308 जिलों के घरेलू उपभोक्ताओं से 41,000 से अधिक जवाब हासिल किए गए:
लिंग अनुपात: जवाब देने वालों में 62 फीसदी पुरुष और 38 फीसदी महिलाएं शामिल रहीं।
शहरी और ग्रामीण प्रतिनिधित्व: लगभग 42% लोग टियर-I शहरों से, 31% टियर-II से और 27% लोग टियर-III, IV और V जिलों (छोटे कस्बों व गांवों) से थे।
ईंधन का गणित: दो हफ्ते में ₹7.50 तक की भारी चपत
यह सर्वे रिपोर्ट सोमवार को पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में क्रमशः ₹2.61 और ₹2.71 प्रति लीटर की ताजा बढ़ोतरी के बाद आई है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में यह चौथा बड़ा बदलाव है।
15 मई से अब तक की कुल बढ़ोतरी:
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों ने 15 मई से अब तक पेट्रोल में कुल ₹7.38 प्रति लीटर और डीजल में ₹7.52 प्रति लीटर का रिकॉर्ड इजाफा किया है। इस उछाल के बाद दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है।
सर्वे के मुख्य निष्कर्ष: डेली खर्चों पर ट्रिपल अटैक
सर्वे में शामिल उपभोक्ताओं ने माना कि ईंधन के दाम बढ़ने का सीधा असर उनके मासिक बिलों पर पड़ा है:
55% लोगों ने कहा: हालिया बढ़ोतरी के कारण सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट और यात्रा का खर्च बढ़ गया है।
55% लोगों ने कहा: बाजार में रोजमर्रा की जरूरी चीजों और प्रोडक्ट्स की कीमतें ऊपर चली गई हैं।
50% लोगों ने कहा: अन्य आवश्यक कमर्शियल सेवाओं (Services) के दाम भी बढ़ गए हैं।
बिना गाड़ी वाले भी परेशान: चूंकि माल ढुलाई महंगी हुई है, इसलिए जिन घरों में निजी गाड़ियां नहीं हैं, उन्हें भी सब्जियां, राशन और अन्य सामान महंगे दामों पर खरीदने पड़ रहे हैं। हालांकि, 30% लोग ऐसे भी रहे जिन्होंने कहा कि अभी बजट पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
महंगाई से निपटने के लिए जनता का 'प्लान-बी'
ईंधन के बढ़ते खर्च के असर को कम करने के लिए भारतीय उपभोक्ताओं ने अपने लाइफस्टाइल और यात्राओं में कटौती करने की योजना बनाई है:
| ग्राहकों का प्रतिशत | महंगाई से निपटने के लिए उठाया जाने वाला कदम |
|---|---|
| 71% ग्राहक | गैर-जरूरी यात्राओं और वीकेंड पर बाहर घूमना-फिरना पूरी तरह कम कर देंगे। |
| 35% ग्राहक | अपनी अलग-अलग यात्राओं को एक साथ क्लब (कंबाइन) करेंगे ताकि बार-बार गाड़ी न निकालनी पड़े। |
| 29% ग्राहक | महंगे निजी वाहनों को छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कार-पूलिंग या सस्ते ऐप-आधारित साधनों को चुनेंगे। |
| 29% ग्राहक | ईंधन के बढ़े खर्च की भरपाई करने के लिए घर के दूसरे अन्य खर्चों (जैसे शॉपिंग, मनोरंजन) में कटौती करेंगे। |
| 25% ग्राहक | महंगी डिलीवरी से बचने के लिए सामान और सेवाओं के सस्ते या नजदीकी (लोकल) सोर्स की तलाश करेंगे। |
निष्कर्ष:
LocalCircles का यह सर्वे साफ तौर पर चेतावनी दे रहा है कि अगर ईंधन की कीमतों पर जल्द ही लगाम नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा असर बाजार में लिक्विडिटी (पूंजी प्रवाह) पर पड़ेगा। जब लोग अपनी यात्राएं और गैर-जरूरी खर्च रोकेंगे, तो इससे ऑटोमोबाइल, टूरिज्म और रिटेल सेक्टर को आने वाले दिनों में भारी सुस्ती का सामना करना पड़ सकता है।