पद्म पुरस्कार 2026: महिला क्रिकेट की 'धाकड़' कप्तान हरमनप्रीत कौर और पैरा-एथलीट प्रवीन कुमार को राष्ट्रपति ने दिया 'पद्म श्री' सम्मान

मोगा से निकलकर वर्ल्ड कप जीतने तक का हरमनप्रीत का ऐतिहासिक सफर; पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट प्रवीन कुमार की प्रेरणादायी कहानी पर देश को नाज।

25 May 2026  |  50

 

 

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामयी 'पद्म पुरस्कार 2026' समारोह में खेल जगत का सीना उस वक्त गर्व से चौड़ा हो गया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दो महान भारतीय खिलाड़ियों को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से नवाजा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता पैरा हाई जंपर प्रवीन कुमार को उनके अद्वितीय और उत्कृष्ट खेल योगदान के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत किया गया।

हरमनप्रीत कौर: मोगा की गलियों से विश्व विजेता बनने की कहानी

पंजाब के एक छोटे से शहर मोगा में 8 मार्च 1989 को जन्मीं हरमनप्रीत कौर का बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गजब का जुनून था। साल 2009 में इंटरनेशनल डेब्यू करने वाली हरमन आज भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे मजबूत रीढ़ बन चुकी हैं।

उनकी इस उपलब्धि के पीछे हाल ही में रचा गया वो इतिहास है, जब उनकी जादुई कप्तानी और शानदार बल्लेबाजी के दम पर भारतीय महिला टीम ने अपना पहला वनडे (ODI) वर्ल्ड कप जीतकर दुनिया भर में देश का परचम लहराया था।

हरमनप्रीत कौर के शानदार इंटरनेशनल आँकड़े:

टेस्ट मैच: 7 (रन: 230)

वनडे मैच: 164 (रन: 4541)

टी20 मैच: 195 (रन: 3991)

यादगार पारी: 2017 वनडे वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई नाबाद 171 रनों की ऐतिहासिक पारी, जिसने भारत को फाइनल में पहुँचाया था। अब कप्तान हरमनप्रीत की नजरें आगामी 2026 टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर टिकी हैं।

पैरा-एथलीट प्रवीन कुमार: विकलांगता को मात देकर चूमा आसमान

समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश के युवा पैरा-एथलीट प्रवीन कुमार को भी 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया। जन्म से ही एक पैर में विकलांगता से जूझ रहे प्रवीन की कहानी देश के करोड़ों युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज वे T64 श्रेणी में दुनिया के नंबर-1 पैरा हाई जंपर हैं। प्रवीन ने पेरिस 2024 पैरालंपिक में न सिर्फ ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता, बल्कि एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था।

राष्ट्रपति भवन में सोमवार को हुए इस सम्मान समारोह ने यह साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों, तो चाहे मोगा का मैदान हो या विकलांगता की चुनौती, देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने से कोई नहीं रोक सकता।

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