राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा उलटफेर: हार के बाद दिल्ली के करीब आ रही हैं , बदली इंडिया गठबंधन की रणनीति

हार के बाद दिल्ली के करीब आ रही हैं ममता; राहुल गांधी ने सुर में मिलाया सुर, लेकिन तमिलनाडु में टूटा कांग्रेस-DMK का साथ; जानिए विपक्षी खेमे की पूरी इनसाइड स्टोरी।

25 May 2026  |  55

 

 

पॉलिटिकल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे देश की सियासत को हिलाकर रख दिया है। 15 साल तक बंगाल की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को मिले इस बड़े चुनावी झटके के बाद भारतीय राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। अपनी खोई राजनीतिक जमीन को वापस पाने और राष्ट्रीय स्तर पर खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए ममता बनर्जी ने अब जून 2026 के पहले सप्ताह में विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की एक महाबैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, इस अचानक लिए गए फैसले ने गठबंधन के भीतर की आंतरिक खींचतान, अनबन और अविश्वास को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।

1. हार मानने को तैयार नहीं ममता, चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

बंगाल में मिली करारी शिकस्त को आसानी से स्वीकार करने के बजाय ममता बनर्जी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। उन्होंने चुनाव आयोग और पूरी चुनावी प्रक्रिया को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। ममता का आरोप है कि चुनाव के दौरान 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) अभियान और मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई, जिसके चलते उनकी पार्टी की करीब 100 सीटें कम हुईं। इसी 'चुनावी अनियमितता' के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाने के लिए वे अब विपक्षी दलों को एकजुट कर रही हैं।

2. अविश्वास की दीवार: कांग्रेस और सपा को बैठक की खबर ही नहीं!

ममता बनर्जी ने अपनी तरफ से जून में बैठक का एलान तो कर दिया है, लेकिन गठबंधन के बाकी बड़े दलों के बीच आपसी तालमेल की भारी कमी दिख रही है।

सपा-कांग्रेस की अनभिज्ञता: कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) के शीर्ष नेताओं ने साफ कहा है कि उन्हें इस तरह की किसी भी बैठक की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

अखिलेश यादव की शर्त: समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि जब तक ममता बनर्जी खुद सीधे सपा प्रमुख अखिलेश यादव से बातचीत नहीं करतीं, तब तक बैठक में उनकी भागीदारी तय नहीं है। इससे साफ है कि ममता ने यह फैसला बिना सहयोगियों को भरोसे में लिए अचानक लिया है।

3. विरोधाभास: कल तक जो थे जानी दुश्मन, आज बने हमदर्द

यह चुनावी नतीजा भारतीय राजनीति के सबसे बड़े विरोधाभास को भी उजागर करता है। चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी और ममता बनर्जी ने एक-दूसरे पर जमकर सियासी तीर चलाए थे। लेकिन नतीजों के आते ही राजनीतिक मजबूरी ऐसी बदली कि राहुल गांधी, ममता बनर्जी के सुर में सुर मिलाते नजर आए। राहुल ने भी चुनाव आयोग और भाजपा पर वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप लगाते हुए ममता के दावों का खुला समर्थन किया है।

4. 'इंडिया' गठबंधन का बदलता भूगोल: दक्षिण में बड़ा फेरबदल

2026 के विधानसभा चुनावों का असर सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत में गठबंधन का पूरा ढांचा ही बदल गया है:

राज्यगठबंधन का नया समीकरण
पश्चिम बंगालकरारी हार के बाद अलग-थलग पड़ी टीएमसी अब कांग्रेस और राष्ट्रीय दलों के साथ गठबंधन मजबूत करने को मजबूर है।
तमिलनाडु (बड़ा झटका)कांग्रेस और उसकी सबसे पुरानी व मजबूत सहयोगी डीएमके (DMK) का रिश्ता आधिकारिक रूप से टूट चुका है।
तमिलनाडु (नया मोड़)डीएमके से नाता तोड़ने के बाद कांग्रेस ने वहां सरकार बनाने के लिए तमिल सुपरस्टार थलपति विजय की नवगठित पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) से हाथ मिला लिया है।

 

निष्कर्ष:

साफ है कि 2026 के चुनावी नतीजों ने विपक्षी खेमे को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। राष्ट्रीय राजनीति में खुद का अस्तित्व बचाने के लिए क्षेत्रीय क्षत्रप अब नए सिरे से अपनी गोटियां सेट करने में जुट गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर घमासान और तेज होना तय है।

अन्य खबरें