खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: 200 लाख टन से अधिक फर्टिलाइजर का बंपर स्टॉक तैयार, कीमतों में नहीं होगी बढ़ोतरी!

घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और बजट में ₹1.71 लाख करोड़ की भारी सब्सिडी; जून में बुवाई शुरू होने से पहले सरकार ने दी खाद की पूरी गारंटी।

25 May 2026  |  55

 

 

कृषि एवं आर्थिक डेस्क, नई दिल्ली। आगामी खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक आते ही देश के कृषि क्षेत्र और अन्नदाताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि साल 2026 के इस महत्वपूर्ण कृषि सीजन के लिए देश में उर्वरकों (फर्टिलाइजर) का स्टॉक और उनकी सप्लाई चेन पूरी तरह मजबूत है। मांग को समय पर पूरा करने के लिए सरकार ने पहले से ही रणनीतिक तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिससे खाद्य उत्पादन के इस सबसे बड़े चक्र में कोई रुकावट नहीं आएगी।

जरूरत से आधा स्टॉक पहले ही तैयार

आमतौर पर जून महीने से खरीफ फसलों (जैसे धान, मक्का, दालें) की बुवाई शुरू हो जाती है। उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में वर्तमान फर्टिलाइजर स्टॉक 200 लाख टन से अधिक हो चुका है।

कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए कुल 390.54 लाख टन उर्वरक की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। इस लिहाज से सीजन की शुरुआत से पहले ही कुल जरूरत का आधा हिस्सा स्टॉक में सुरक्षित कर लिया गया है, जो निर्बाध कृषि कार्यों की गारंटी देता है।

आत्मनिर्भरता की ओर कदम: घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड उछाल

भारत की फर्टिलाइजर सुरक्षा को मजबूत करने में घरेलू उत्पादन और समय पर किए गए आयात का बड़ा हाथ है।

ताजा आंकड़े: इस सीजन की तैयारी के लिए देश में करीब 95 लाख टन फर्टिलाइजर का घरेलू उत्पादन किया जा चुका है, जबकि 22.6 लाख टन आयातित स्टॉक भी भारत पहुंच चुका है।

उत्पादन में वृद्धि: उर्वरक विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल फर्टिलाइजर उत्पादन (यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी सहित) साल 2021 के 433.29 लाख टन से बढ़कर साल 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन पर पहुंच गया है।

यूरिया उत्पादन: अकेले यूरिया का उत्पादन 2014-15 के 225 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन हो गया है, जो भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

नहीं बढ़ेंगी कीमतें, मिलती रहेगी भारी सब्सिडी

वैश्विक बाजारों में कच्चे माल और फर्टिलाइजर की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत सरकार ने किसानों को वैश्विक झटकों से बचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय बजट 2026-27 में उर्वरक सब्सिडी के लिए ₹1.71 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं।

इसी भारी सब्सिडी के चलते देश के किसानों को सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले उर्वरक पुरानी और स्थिर कीमतों पर ही मिलते रहेंगे:

उर्वरक का प्रकारवजन (प्रति बैग)तय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP)
नीम-कोटेड यूरिया45 किलोग्राम₹242
डीएपी (DAP)50 किलोग्राम₹1,350

 

सरकार की पैनी नजर, लगातार हो रही मॉनिटरिंग

सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा को रोकने के लिए सरकार लगातार उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कर रही है। अतिरिक्त सचिव ने बताया कि सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह (Empowered Group of Secretaries) अब तक 9 बार बैठकें कर चुका है। यह समूह देश भर में तैयार फर्टिलाइजर के साथ-साथ उनके कच्चे माल की उपलब्धता पर भी हर पल पैनी नजर रखे हुए है, ताकि किसी भी राज्य या जिले में खाद की किल्लत की स्थिति पैदा ही न हो पाए।

आर्थिक दृष्टिकोण से महत्व:

भारतीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी को देखते हुए, फर्टिलाइजर की यह सुनिश्चित उपलब्धता देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बेहतरीन और सकारात्मक संकेत है।

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