अलर्ट पर भारत: इबोला की एंट्री रोकने को सरकार का बड़ा एक्शन, एयरपोर्ट्स पर थर्मल स्क्रीनिंग और 'सेल्फ डिक्लेरेशन' अनिवार्य

कोविड-काल की यादें हुईं ताजा; अफ्रीका के हॉटजोन से आने वाले विमानों के लिए DGCA ने जारी किया सख्त प्रोटोकॉल, संदिग्ध मरीजों के लिए आरक्षित होंगी सीटें।

26 May 2026  |  99

 

 

नई दिल्ली। दुनिया के कुछ देशों में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। देश में इबोला के संभावित प्रसार को रोकने के लिए विमानन नियामक संस्था 'डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन' (DGCA) ने एयरलाइंस के लिए एक बेहद सख्त हेल्थ प्रोटोकॉल जारी किया है। इसके तहत अफ्रीका के इबोला हॉटजोन (प्रभावित क्षेत्रों) से आने वाले सभी यात्रियों के लिए 'सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म' (SDF) भरना और हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग से गुजरना अनिवार्य कर दिया गया है।

कोविड की तर्ज पर DGCA का नया प्रोटोकॉल: विमानों में लागू होंगे ये नियम

इबोला के ट्रांसमिशन को रोकने के लिए विमानन कंपनियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं:

खाली रखनी होंगी सीटें: यदि विमान में कोई संदिग्ध मरीज मिलता है, तो सुरक्षा के लिहाज से उसके आगे और पीछे की तीन-तीन लाइनें (सीटें) खाली रखनी होंगी।

एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को सूचना: एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा, एमिरेट्स और कतर एयरवेज जैसी प्रमुख एयरलाइंस, जो प्रभावित देशों से पैसेंजर्स ला रही हैं, उन्हें संदिग्ध मरीज की स्थिति में तुरंत ATC को सूचित करना होगा ताकि विमान को एयरपोर्ट पर एक अलग 'बे' (bay) में पार्क किया जा सके।

उतरने का विशेष क्रम: विमान के लैंड होते ही सबसे पहले उन यात्रियों को उतारा जाएगा जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं। संदिग्ध या बीमार यात्रियों को सबसे आखिर में विमान के पिछले हिस्से से उतारा जाएगा और सीधे मेडिकल टीम के हवाले किया जाएगा, ताकि दूसरे यात्रियों से उनका एक्सपोजर कम से कम हो।

यात्रियों के लिए विशेष इन-फ्लाइट घोषणा और गाइडलाइंस

उड़ान के दौरान अब एयरलाइंस द्वारा विशेष घोषणाएं की जा रही हैं, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

लक्षण दिखने पर न छुपाएं जानकारी:

यदि किसी भी यात्री (चाहे वह भारतीय हो या विदेशी) को बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, शरीर पर चकत्ते या ब्लीडिंग (रक्तस्राव) की शिकायत है, तो उसे तुरंत केबिन क्रू और लैंडिंग के बाद इमिग्रेशन/मेडिकल यूनिट को सूचित करना होगा।

21 दिनों की निगरानी: सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स के लिए 'सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म' भरकर इमिग्रेशन काउंटर पर जमा करना अनिवार्य है। यदि भारत पहुँचने के 21 दिनों के भीतर इनमें से कोई भी लक्षण विकसित होता है, तो यात्री को तुरंत निर्धारित अस्पतालों से चिकित्सा सहायता लेनी होगी और एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिस को सूचित करना होगा।

सरकार का मानना है कि इस बीमारी के समय रहते निदान और त्वरित उपचार के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करना देश की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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