शांति वार्ता के बीच दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमला: 'आत्मरक्षा' में मिसाइल साइट और बारूदी नौकाएं कीं नष्ट, ट्रंप की दो टूक- 'सौंपे या नष्ट करे यूरेनियम'

एक तरफ समझौते की टेबल, दूसरी तरफ गरजती मिसाइलें; स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंग बिछाने की ईरानी कोशिश नाकाम, तटीय शहरों में धमाकों से गूंजा आसमान।

26 May 2026  |  94

 

 

वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और शांति समझौते को लेकर चल रही बेहद संवेदनशील बातचीत के बीच एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में 'आत्मरक्षा' (Self-Defense) का हवाला देते हुए बड़ा हवाई हमला किया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई मौजूदा युद्धविराम के दौरान अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरानी खतरों को बेअसर करने के लिए की गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछाने का प्रयास नाकाम

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी तट पर उन ठिकानों को निशाना बनाया जो अमेरिकी सैनिकों और विमानों के लिए सीधा खतरा बन रहे थे।

मिसाइल साइट्स पर स्ट्राइक: हमले में ईरान के प्रमुख तटीय मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों (Missile Launch Sites) को तबाह कर दिया गया।

नौकाएं की गईं नष्ट: स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने का प्रयास कर रही ईरानी नौकाओं को अमेरिकी बलों ने मार गिराया।

कमांड ने स्पष्ट किया कि अमेरिका मौजूदा सीजफायर (युद्धविराम) के नियमों के तहत पूरी तरह संयम बरत रहा है, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा।

तटीय शहरों में धमाकों की गूंज, 4 की मौत की खबर

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अमेरिकी हमले के दौरान ईरान के मुख्य नौसैनिक बेस वाले शहर बंदर अब्बास और उसके आसपास के तटीय इलाकों में कई तेज विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इसके अलावा दक्षिणी तट के पास स्थित सिरिक और जास्क शहरों में भी धमाके दर्ज किए गए। ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, इस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई है और दो ईरानी पोत क्षतिग्रस्त हुए हैं।

ट्रंप का सख्त रुख: "यूरेनियम तुरंत अमेरिका को सौंपे या नष्ट करे ईरान"

इस सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। मेमोरियल डे (Memorial Day) के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दोहराया, "ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।"

इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर भावी शांति समझौते की शर्तों को लेकर रुख साफ करते हुए कहा:

राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी:

"ईरान के पास जितना भी संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) है, उसे या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दिया जाए ताकि हम उसे लाकर नष्ट कर सकें। या फिर दूसरा बेहतर विकल्प यह है कि ईरान हमारे साथ मिलकर अपने ही देश में या किसी अन्य स्वीकार्य स्थान पर इसे पूरी तरह नष्ट कर दे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 'परमाणु ऊर्जा आयोग' (Atomic Energy Commission) या उसके समकक्ष कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था गवाह के रूप में मौजूद रहनी चाहिए।"

वार्ता आगे बढ़ रही है, लेकिन समझौता अभी तय नहीं

एक तरफ जहाँ राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि बातचीत "अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है", वहीं दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सावधानी बरतते हुए कहा है कि कई मुद्दों पर निष्कर्ष पर पहुँचने के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि समझौता बिल्कुल करीब है। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी साफ कर दिया है कि अमेरिका या तो एक बेहतरीन समझौता करेगा, या फिर ईरान से "दूसरे तरीके" से निपटा जाएगा। फिलहाल इस ताजा हमले ने चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुँचा दिया है।

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