कूटनीतिक हलचल: बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान जून में जाएंगे चीन, भारत के साथ तीस्ता विवाद के बीच पहली विदेश यात्रा

बीएनपी सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा पर नई दिल्ली की नजर; तीस्ता नदी परियोजना के लिए बीजिंग से फंडिंग की तैयारी।

26 May 2026  |  56

 

 

ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी नई बीएनपी (BNP) सरकार के प्रधानमंत्री तारिक रहमान जून के अंत में अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर चीन जा सकते हैं। इस यात्रा को लेकर दक्षिण एशियाई कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल-बंटवारे के मुद्दे को लेकर कूटनीतिक तनाव का एक नया केंद्र बन गया है।

दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पहली विदेश यात्रा के लिए भूटान को चुना गया था, और उन्होंने अभी तक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण को भी स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में उनकी पहली विदेश यात्रा के रूप में चीन का चयन कई कूटनीतिक संकेत दे रहा है।

तीस्ता और गंगा जल-बंटवारा: भारत के साथ तनाव की वजह

नई दिल्ली द्वारा इस यात्रा पर बेहद बारीकी से नजर रखे जाने की संभावना है। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

तीस्ता प्रोजेक्ट के लिए चीनी फंडिंग: बांग्लादेश लंबे समय से अटके 'तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना' के लिए चीन से वित्तीय मदद (फंडिंग) हासिल करना चाहता है। विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पुष्टि की है कि इस परियोजना को लेकर चीन के एक्जिम बैंक (Exim Bank) के साथ बातचीत फलदायी रही है।

गंगा समझौते पर बांग्लादेश का रुख: बांग्लादेश की नई सरकार ने साफ किया है कि भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंध काफी हद तक 'गंगा जल-बंटवारे समझौते' को नए सिरे से लागू करने या उसे अंतिम रूप देने पर निर्भर करेंगे। ढाका ने जोर देकर कहा है कि इस मामले में कोई भी शॉर्ट-टर्म (अल्पकालिक) समझौता पर्याप्त नहीं होगा।

"संबंध नई ऊंचाइयों पर": बांग्लादेश को चीन का खुला समर्थन

बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ रहे इस जुड़ाव को बीजिंग का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने हाल ही में कहा कि प्रधानमंत्री तारिक की आगामी यात्रा दोनों देशों के बीच साझेदारी को "नई ऊंचाइयों" पर ले जाएगी।

चीन का आधिकारिक रुख:

"चीन बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने, आर्थिक विकास और जन कल्याणकारी गतिविधियों में अपना पूरा समर्थन देना जारी रखेगा।"

बेल्ट एंड रोड (BRI) समेत कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग

तीस्ता नदी परियोजना के अलावा, चीन और बांग्लादेश अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने में जुटे हैं। दोनों देशों ने उच्च-गुणवत्ता वाले 'बेल्ट एंड रोड' (Belt and Road Initiative - BRI) सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके तहत व्यापार, निवेश, उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, जल संसाधन, स्वास्थ्य और संस्कृति (लोगों के बीच संपर्क) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आदान-प्रदान और आपसी सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

कार्यक्रम अभी अंतिम चरण में:

हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर का कहना है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा निश्चित है, लेकिन इस पहली द्विपक्षीय यात्रा की सटीक तारीख और विस्तृत कार्यक्रम को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस त्रिकोणीय कूटनीति (भारत-बांग्लादेश-चीन) में क्या नए समीकरण बनते हैं।

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