मरुधरा में जल क्रांति: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुरू किया ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’, नदियों को जोड़ेगा ‘रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट’

डूंगरपुर के ऐतिहासिक वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल की तर्ज पर अब पूरे राजस्थान को जल-आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी; 20 फीट तक सुधरेगा भूजल स्तर।

26 May 2026  |  91

 

 

जयपुर। राजस्थान में गहराते जल संकट के स्थायी समाधान और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सोमवार से प्रदेशव्यापी “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” का भव्य आगाज़ किया गया। इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य जल संचय और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर जन-जन में अलख जगाना है, ताकि भावी पीढ़ियों के लिए पानी की एक-एक बूंद को सहेजा जा सके।

स्वच्छ भारत मिशन (राजस्थान) के प्रदेश ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने दो टूक कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि इसे एक 'जन आंदोलन' बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

‘रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट’ से बदलेगी राजस्थान की तकदीर

ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच के प्रतीक “रामजल सेतु लिंक प्रोजेक्ट” की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राजस्थान के जल भविष्य के लिए संजीवनी साबित होगी।

नदियों का संगम: इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश की विभिन्न नदियों को आपस में जोड़कर जल संतुलन स्थापित किया जाएगा।

न्यायसंगत वितरण: यह योजना बाढ़ और सूखे की स्थिति को नियंत्रित कर पानी को उन इलाकों तक पहुंचाएगी जहां इसकी सबसे ज्यादा किल्लत है।

विकास की नई दिशा: विशेषज्ञ इसे राजस्थान के जल इतिहास का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी अध्याय मान रहे हैं।

तालाबों का पुनर्जीवन और वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर

राजस्थान जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में पारंपरिक जल स्रोतों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगभग 300 ऐतिहासिक और कृत्रिम तालाब मौजूद हैं, जिनकी स्थिति फिलहाल चिंताजनक है। इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए सरकार एक सख्त ब्लूप्रिंट पर काम कर रही है:

अतिक्रमण पर प्रहार: जल आवक मार्गों और कैचमेंट एरिया से हर प्रकार के अवैध निर्माण हटाए जाएंगे।

डिसिल्टिंग और सफाई: तालाबों की गहराई बढ़ाने के लिए गाद (सिल्ट) निकाली जाएगी और नियमित सफाई होगी।

भूजल में सुधार: तालाबों में वर्षा जल ठहरने से न केवल मवेशियों और खेती को सालभर पानी मिलेगा, बल्कि आसपास का वाटर टेबल भी तेजी से ऊपर आएगा।

नज़ीर बना 'डूंगरपुर मॉडल': दिल्ली सरकार ने भी अपनाया

प्रेस विज्ञप्ति में के.के. गुप्ता ने वर्ष 2015 से 2020 के बीच डूंगरपुर नगर परिषद द्वारा किए गए चमत्कारी कार्यों का उदाहरण देश के सामने रखा। डूंगरपुर का यह सफल प्रयोग अब पूरे राजस्थान में लागू किया जा रहा है:

डूंगरपुर की सफलता के आंकड़े:

पुरानी बावड़ियों और कुओं की सफाई से जलदाय विभाग को रोज़ाना 8 लाख लीटर अतिरिक्त पानी मिलना शुरू हुआ।

100 सरकारी भवनों और 500 निजी घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया गया।

इसका असर यह हुआ कि मात्र एक साल में वहां का भूजल स्तर 20 फीट ऊपर आ गया और पानी की गुणवत्ता सुधरी (टीडीएस स्तर 840 से घटकर 570 रह गया)।

डूंगरपुर की इस कामयाबी को देखकर तत्कालीन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दिल्ली सरकार को इस मॉडल का अध्ययन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद दिल्ली से आई टीम ने इसे अपने यहां लागू किया, जिसके तहत वहां वाटर हार्वेस्टिंग के लिए 50 हजार रुपये की सब्सिडी और पानी के बिल में 10% की छूट देने जैसी घोषणाएं की गईं।

लक्ष्य: देश का अग्रणी राज्य बनेगा राजस्थान

के.के. गुप्ता ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इन भागीरथी प्रयासों से राजस्थान बहुत जल्द जल संरक्षण और सतत विकास (Sustainable Development) के मामले में देश का नंबर-वन राज्य बनकर उभरेगा। सरकार के इस कदम से न केवल पानी की किल्लत दूर होगी, बल्कि मरुधरा के पर्यावरण को भी एक नया जीवन मिलेगा।

अन्य खबरें