ग्लोबल ऑयल संकट के बीच भारत के लिए राहत की खबर: बंगाल के 'अशोकनगर' में मिला 24 करोड़ बैरल कच्चे तेल का महाभंडार

पश्चिम एशिया में युद्ध और 'स्ट्रेट ऑफ हार्मुज' की नाकेबंदी के बीच संकटमोचक बनेगा पूर्वी भारत का पहला तेल क्षेत्र; ONGC जल्द शुरू करेगी कमर्शियल प्रोडक्शन।

26 May 2026  |  98

 

अशोकनगर (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव (West Asia War) के कारण वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। ईरान द्वारा फारस की खाड़ी से गुजरने वाले दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हार्मुज' को बंद किए जाने से भारत के सामने कच्चे तेल की आपूर्ति का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आसमान छूती कीमतों के बीच, भारत के लिए पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के एक छोटे से कस्बे 'अशोकनगर' से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहाँ देश का एक ऐसा विशाल ऑयल फील्ड कमर्शियल प्रोडक्शन (व्यावसायिक उत्पादन) के लिए तैयार है, जो भारत की पेट्रोल-डीजल की निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है।

पूर्वी भारत का पहला बड़ा हाइड्रोकार्बन ब्लॉक: छिपी है अथाह दौलत

अशोकनगर का यह तेल क्षेत्र पूर्वी भारत के इतिहास में पहला ऐसा ब्लॉक है, जहाँ इतनी विशाल मात्रा में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के भंडार की पुष्टि हुई है। शुरुआती भूगर्भीय अनुमानों के मुताबिक:

इस जमीन के नीचे 24 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल दबा हुआ है। ओएनजीसी (ONGC) ने साल 2018 में सबसे पहले इस तेल क्षेत्र की खोज की थी, और अब यहाँ से बड़े पैमाने पर तेल निकालने (Extraction) की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुँच चुकी है।

विवादों का अंत: केंद्र और राज्य सरकार की बढ़ी सक्रियता

जानकारों के मुताबिक, अशोकनगर ऑयल फील्ड से तेल निकालने का काम काफी पहले शुरू हो सकता था। लेकिन स्थानीय भूमि विवादों, कुछ नीतिगत अड़चनों और पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान हुए राजनीतिक विरोध के कारण ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) को यहाँ ड्रिलिंग का काम बीच में ही रोकना पड़ा था। हालांकि, अब राज्य की बदली परिस्थितियों और केंद्र सरकार के सख्त व सहयोगात्मक रुख के बाद ओएनजीसी के सामने आने वाली सभी बाधाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं।

वित्त मंत्री से मुलाकात और मिशन मोड में प्रोजेक्ट

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बाधित सप्लाई को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को 'मिशन मोड' में शुरू करने के लिए राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में भाजपा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से विशेष मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था को एक नया बूस्टर डोज देने और अशोकनगर तेल क्षेत्र से बिना किसी देरी के तुरंत उत्पादन शुरू करने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा हुई है।

भारत के लिए क्यों गेम-चेंजर है यह खोज?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या तनाव के कारण सप्लाई चैन टूटती है, तो देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस के दाम तेजी से बढ़ने लगते हैं। अशोकनगर में 24 करोड़ बैरल क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट के चालू होते ही न केवल भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश की विदेशी मुद्रा की भी भारी बचत होगी। साथ ही, यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पूर्वी क्षेत्र का सबसे बड़ा पावर हब बनकर उभरेगा।

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