नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते कदम अब कामकाजी पेशेवरों के लिए बड़ी मुसीबत बनने वाले हैं। गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियों द्वारा एआई पर अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बीच एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। मशहूर कंसल्टिंग फर्म मर्सर (Mercer) की इस ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले दो वर्षों के भीतर एआई के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी हो सकती है और कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या में 20 प्रतिशत तक की भारी कटौती कर सकती हैं।
90% सीईओ को भरोसा: इंसानों की जगह लेगा AI
मर्सर द्वारा अमेरिका के करीब 1000 बड़े एग्जीक्यूटिव्स और एचआर (HR) लीडर्स के बीच किए गए इस सर्वे के नतीजे बेहद डराने वाले हैं:
हेडकाउंट में कमी: लगभग 9 में से 10 (करीब 90 प्रतिशत) सीईओ का मानना है कि एआई आने वाले समय में इंसानी काम की जगह ले सकता है और कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या (Headcount) को कम कर सकता है।
ऑटोमेशन पर जोर: रिपोर्ट के मुताबिक, एआई अब सिर्फ एक प्रयोग नहीं रह गया है, बल्कि कंपनियां इसके जरिए रोजमर्रा के ऑफिस वर्क को ऑटोमेट (स्वचालित) कर रही हैं, जिससे इंसानों पर उनकी निर्भरता घट रही है।
इंसानी काम का घटेगा ग्राफ, टेक सेक्टर में हाहाकार
रिपोर्ट में कंपनियों के भीतर इंसानी काम के घटते दायरे को लेकर बेहद चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए गए हैं:
| कार्यबल का स्वरूप | वर्तमान स्थिति (2026) | अगले दो साल में अनुमान |
|---|---|---|
| पूरी तरह इंसानों द्वारा किया जाने वाला काम | 50% | घटकर सिर्फ 35% रह जाएगा |
| एआई और ऑटोमेशन का दखल | 50% | बढ़कर 65% होने का अनुमान |
2026 में अब तक 1.15 लाख नौकरियां खत्म: एआई के इस बढ़ते दखल का असर जमीन पर भी दिखने लगा है। 'लेऑफ्स डॉट एफवाईआई' (Layoffs.fyi) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल 2026 में अब तक 150 से ज्यादा टेक कंपनियों में करीब 1.15 लाख कर्मचारियों की छंटनी की जा चुकी है।
कर्मचारियों में बढ़ा मानसिक तनाव और असुरक्षा
भविष्य के इस धुंधले एआई संकट और आर्थिक अनिश्चितता ने कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित किया है। मर्सर की रिपोर्ट के अनुसार:
घट गया कॉन्फिडेंस: साल 2024 में जहां 66 प्रतिशत कर्मचारी अपनी नौकरी में खुद को सुरक्षित और बेहतर स्थिति में मानते थे, वहीं साल 2026 में यह आंकड़ा तेजी से गिरकर महज 44 प्रतिशत रह गया है।
मजबूरी की नौकरी: नौकरी जाने के डर से आज लाखों कर्मचारी मौजूदा काम से असंतुष्ट होने के बावजूद इस्तीफा देने का जोखिम नहीं उठा पा रहे हैं।
हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जहाँ कंपनियाँ एआई में भारी निवेश कर रही हैं, वहीं कई फर्में अब तक इससे वास्तविक बिजनेस मुनाफा कमाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
बहस के बीच सैम ऑल्टमैन का यू-टर्न
एक तरफ जहाँ वैश्विक रिपोर्ट्स एआई के खतरे को बड़ा बता रही हैं, वहीं ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन के सुर बदले नजर आ रहे हैं। हाल ही में सिडनी में 'कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया' की एक कॉन्फ्रेंस में ऑल्टमैन ने कहा:
"मुझे खुशी है कि मैं गलत साबित हुआ। मुझे लगा था कि अब तक एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर जॉब्स पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा, लेकिन असलियत में ऐसा नहीं हुआ। जितनी नौकरियां जाने की आशंका थी, नुकसान उससे कहीं कम हुआ है।"
निष्कर्ष: सैम ऑल्टमैन के दिलासे के बावजूद, मर्सर की यह ग्राउंड रिपोर्ट और टेक जगत में लगातार जारी छंटनी के आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि एआई का तूफान आने वाले दिनों में वर्कप्लेस की तस्वीर को पूरी तरह बदलने वाला है। पेशेवरों को अब इस नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के लिए खुद को 'अपस्किल' करना ही होगा।