बर्लिन। तीन दशकों तक जर्मनी की पुलिस और खुफिया एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने वाली यूरोप की 'मोस्ट वॉन्टेड' महिला और फार-लेफ्ट (चरम वामपंथी) ग्रुप 'रेड आर्मी फैक्शन' (RAF) की आखिरी फरार सदस्य डेनिएला क्लेट के भागने का सफर आखिरकार सलाखों के पीछे खत्म हो गया है। जर्मनी की एक अदालत ने एक लंबे ऐतिहासिक मुकदमे के बाद क्लेट को 13 साल कैद की सजा सुनाई है।
अदालत में फैसला सुनाए जाते वक्त क्लेट के चेहरे पर पछतावे की एक भी लकीर नहीं दिखी, जिससे उनके समर्थक बेहद उग्र हो गए और कोर्ट परिसर में ही उनकी रिहाई के नारे लगाने लगे।
बर्लिन में छिपकर जी रही थी गुमनाम जिंदगी
डेनिएला क्लेट को जर्मन सुरक्षा एजेंसियों ने एक गुप्त अभियान के तहत साल 2024 में बर्लिन से गिरफ्तार किया था। वह करीब 30 साल से वहां अपनी पहचान बदलकर एक आम नागरिक की तरह रह रही थी। गिरफ्तारी के बाद उन पर करीब 14 महीने तक रिमांड और अदालत में मुकदमा चला, जिसके बाद अब उन्हें जेल भेज दिया गया है।
घर से मिला 'मिनी शस्त्रागार':
जब पुलिस ने क्लेट के ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर सुरक्षा एजेंसियां भी दंग रह गईं। क्लेट के घर से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा, एक नकली बजूका, सोना, जाली दस्तावेज, खुद को छिपाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विग और डकैती के जरिए जुटाई गई भारी-भरकम नकदी बरामद हुई थी।
पूंजीवाद के खिलाफ 'अंडरग्राउंड' जंग और ₹22 करोड़ की डकैती
ब्रिटिश मीडिया (BBC) की रिपोर्ट के अनुसार, डेनिएला क्लेट ने अपने साथी पूर्व RAF सदस्यों—बुरखार्ड गारवेग और अर्न्स्ट-वोल्कर स्टॉब—के साथ मिलकर जर्मनी में कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया था।
करोड़ों की लूट: क्लेट और उनके साथियों पर आरोप है कि उन्होंने साल 1999 से 2016 के बीच सुपरमार्केट और कैश-ट्रांसपोर्ट वाहनों में डकैतियों की एक पूरी श्रृंखला चलाई। इसके जरिए उन्होंने करीब 24 लाख यूरो (लगभग 22 करोड़ रुपये) चुराए।
संगठन के खात्मे के बाद भी सक्रिय: हालांकि 'रेड आर्मी फैक्शन' (RAF) आधिकारिक रूप से 1998 में ही खत्म हो गया था, लेकिन इस लूटी गई रकम का इस्तेमाल अंडरग्राउंड रह रहे संगठन के बाकी बचे भगोड़ों की जिंदगी गुजारने और उनकी वामपंथी विचारधारा को जीवित रखने के लिए किया जा रहा था।
कोर्ट में नहीं थमा वैचारिक तेवर
अदालत में जब 2025 से यह मुकदमा शुरू हुआ, तब भी क्लेट के तेवर बिल्कुल नहीं बदले थे। उन्होंने खुद पर चल रहे कानूनी ट्रायल को 'राजनीतिक दबाव' बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। क्लेट ने अदालत के सामने साफ तौर पर कहा कि पूंजीवाद (Capitalism) के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
| मुख्य आरोपी | वर्तमान स्थिति | सुरक्षा एजेंसियों का अगला कदम |
|---|---|---|
| डेनिएला क्लेट | 13 साल की जेल की सजा सुनाकर जेल भेजी गई। | मामले की आगे की कड़ियों को जोड़ना। |
| बुरखार्ड गारवेग | अभी भी फरार। | जर्मनी पुलिस द्वारा पूरे यूरोप में सघन तलाश जारी। |
| अर्न्स्ट-वोल्कर स्टॉब | अभी भी फरार। | अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों (इंटरपोल) की मदद से इनपुट जुटाना। |
क्लेट की इस सजा के बाद जर्मन पुलिस का पूरा ध्यान अब उनके दो फरार साथियों—बुरखार्ड गारवेग और अर्न्स्ट-वोल्कर स्टॉब—पर टिक गया है। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद ही जर्मनी के इतिहास के इस हिंसक वामपंथी अध्याय का पूरी तरह अंत हो सकेगा।