तेहरान / वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही नाजुक और अप्रत्यक्ष शांति वार्ता के बीच, अब ईरान के भीतर ही कूटनीतिक प्रक्रिया और निर्णय लेने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस कूटनीतिक महा-मंथन में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की प्रत्यक्ष भागीदारी और उनकी जानकारी के स्तर को लेकर कूटनीतिक हलकों में गहरा भ्रम (Confusion) बना हुआ है।
'ईरान इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि ईरान की मुख्य वार्ता टीम और सर्वोच्च नेतृत्व के बीच वास्तविक तालमेल को लेकर तेहरान के गलियारों में अटकलें बेहद तेज हो गई हैं।
संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री की कतर यात्रा से बढ़ा शक
यह असमंजस उस समय और गहरा गया जब हाल ही में ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कतर की महत्वपूर्ण यात्रा की।
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, गालिबाफ और ईरान की पूरी वार्ता टीम इस संवेदनशील मुद्दे पर सर्वोच्च नेता खामेनेई के साथ पूरी तरह से समन्वय (Coordination) में हैं या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। तेहरान के प्रतिनिधियों और अमेरिका के बीच पिछले दिनों जो आपसी समझ बनी है, क्या उसकी बिंदुवार जानकारी सर्वोच्च नेता तक पहुंच रही है, इस पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इसके अलावा, ईरानी वार्ता टीम के तेहरान में ही जमी रहने या फिर पाकिस्तान (जो कि वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है) जाने से हिचकिचाने की खबरों ने आंतरिक मतभेदों की चर्चा को और हवा दे दी है।
संघर्षविराम के उल्लंघन और हमलों के बीच कूटनीति
यह भ्रम ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील हो चुके हैं:
कुवैत पर पलटवार: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को ईरान पर संघर्षविराम के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया। वहीं कुवैत ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा में ईरान की ओर से दागी गईं मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराया है। ईरान ने इसे अमेरिका द्वारा बंदर अब्बास पर किए गए हमले का जवाब बताया है।
ट्रंप का आश्वस्त रुख: इस सैन्य तनाव के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैबिनेट बैठक में दावा किया कि बातचीत अभी भी आगे बढ़ रही है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान इस समय बेहद 'कमजोर स्थिति' में बात कर रहा है और वह अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के दबाव में आकर किसी जल्दबाजी में अधूरा समझौता नहीं करेंगे।
परमाणु और हिजबुल्ला पर फंसा है मुख्य पेंच
दोनों देशों के बीच तैयार किए जा रहे 14 सूत्रीय समझौता मसौदे (Draft Agreement) में कई ऐसे बिंदु हैं, जिस पर ईरान के भीतर भारी वैचारिक टकराव होने की संभावना जताई जा रही है:
| वार्ता के प्रमुख बिंदु | वर्तमान स्थिति और मतभेद |
|---|---|
| संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) | प्रस्ताव के तहत ईरान को अपने उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम का भंडार छोड़ना या नष्ट करना होगा, जिसके बदले अमेरिका $12 से $24 बिलियन की फ्रीज संपत्ति जारी करेगा। |
| हिजबुल्ला का भविष्य | ईरान चाहता है कि इस शांति समझौते का दायरा लेबनान तक हो और इसमें इजरायल-हिजबुल्ला संघर्षविराम भी शामिल हो, जिसे लेकर अमेरिका और इजरायल सहमत नहीं हैं। |
| होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण | जलमार्ग को व्यापार के लिए पूरी तरह खोलने और उस पर लगने वाले सर्विस टैक्स/टोल को लेकर दोनों पक्षों में गहरा गतिरोध है। |
इन बड़े और रणनीतिक मुद्दों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए ईरान में सर्वोच्च नेता की स्पष्ट सहमति होना अनिवार्य है। ऐसे में, यदि वार्ता टीम और सर्वोच्च नेता के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और अंतिम फैसलों को लेकर चल रहा यह भ्रम दूर नहीं होता, तो अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया एक बार फिर पटरी से उतर सकती है।