बंगाल में ऐतिहासिक फतेह के बाद अब 'मिशन यूपी' पर अमित शाह: जून से शुरू होगा मैराथन दौरा, 2027 के लिए बिछने लगी बिसात

पश्चिम बंगाल की जीत का 'सक्सेस फॉर्मूला' उत्तर प्रदेश में आजमाएगी भाजपा; बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र से होगी चुनावी शंखनाद की शुरुआत।

28 May 2026  |  81

 

 

लखनऊ / नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में मिली ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब देश के सबसे बड़े सियासी सूबे उत्तर प्रदेश को साधने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह अब 'मिशन यूपी 2027' की कमान अपने हाथों में लेने जा रहे हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की राजनीतिक नब्ज टटोलने और जमीनी हकीकत को भांपने के लिए जून के महीने से ही अमित शाह का राज्य में मैराथन दौरा शुरू हो सकता है।

उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में जून से लेकर सितंबर तक चलने वाले इस चार महीने के सघन दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसके आधार पर भाजपा आगामी चुनाव का अंतिम ब्लूप्रिंट (रणनीतिक खाका) तैयार करेगी।

बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र से होगी शुरुआत

यद्यपि अमित शाह के उत्तर प्रदेश दौरे का विस्तृत और आधिकारिक कार्यक्रम अभी पूरी तरह तय होना बाकी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जून के पहले चरण में वे राज्य के दो प्रमुख क्षेत्रों—बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र का रुख करेंगे।

संगठन की किलेबंदी:

इस दौरे के दौरान अमित शाह न केवल स्थानीय बड़े नेताओं बल्कि जिला, ब्लॉक और सीधे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं (ग्रासरूट वर्कर) से सीधे संवाद करेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा स्थानीय जनभावनाओं को समझना, सामाजिक समीकरणों (जातीय संतुलन) को दुरुस्त करना और संगठन के भीतर की कमियों को दूर करना होगा।

क्यों आसान नहीं है 2027 की डगर?

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए उत्तर प्रदेश का यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि पार्टी के लिए अपने पुराने रिकॉर्ड को दोहराना एक बड़ी चुनौती होगी:

लोकसभा 2024 का झटका: साल 2014 में अकेले 71 सीटें और 2019 में 62 सीटें जीतने वाली भाजपा, 2024 के लोकसभा चुनाव में महज 32 सीटों पर सिमट गई थी। इस सीटों के नुकसान को पार्टी बहुत गंभीरता से ले रही है।

विधानसभा का ट्रेंड: 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा ने 2017 में ऐतिहासिक 312 सीटें हासिल की थीं, जो 2022 के चुनाव में घटकर 255 रह गईं। इस गिरावट को रोकने और ग्राफ को दोबारा ऊपर ले जाने के लिए अभी से किलेबंदी की जा रही है।

यूपी में लागू होगा 'बंगाल मॉडल'

अमित शाह उत्तर प्रदेश फतह करने के लिए उसी रणनीति को लागू करने की तैयारी में हैं, जिसने हाल ही में पश्चिम बंगाल में पार्टी को प्रचंड और ऐतिहासिक सफलता दिलाई है।

सांगठनिक रणनीतिकार्यान्वयन और स्वरूप
क्षेत्रीय विभाजनभाजपा ने सांगठनिक दृष्टि से पूरे उत्तर प्रदेश को 6 प्रमुख हिस्सों में बांट रखा है: पश्चिमी उत्तर प्रदेश, काशी, बुंदेलखंड, ब्रज, अवध और गोरखपुर।
माइक्रो-मैनेजमेंटबंगाल की तर्ज पर इन क्षेत्रों को अलग-अलग जोन में बांटकर केंद्रीय संगठन सचिवों और वरिष्ठ कद्दावर नेताओं को स्वतंत्र प्रभार सौंपा जाएगा।
अंतिम चरण (अक्टूबर)जून से सितंबर तक सभी छह क्षेत्रों का दौरा पूरा होने के बाद, अक्टूबर महीने से सीधे 'बूथ जीतो, चुनाव जीतो' की रणनीति पर जमीनी काम शुरू होगा।

 

इसके पहले भाजपा ने इसी तरह के 'जोनल माइक्रो-मैनेजमेंट' के सहारे बिहार और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में भी जबरदस्त सफलता का स्वाद चखा था। साफ है कि बंगाल की ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसी भी तरह के आत्मसंतोष में नहीं है और 'मिशन 2027' के लिए दिल्ली से लखनऊ तक बिसात बिछाई जा चुकी है।

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