पेट्रोल पंपों पर मिलेगा 'सुपरमार्केट' जैसा मजा! अपनी पसंद से चुनें E20, E22 या E30 पेट्रोल; सरकार की बड़ी तैयारी

ग्राहकों को मिलेंगे अलग-अलग इथेनॉल ब्लेंड्स के विकल्प; कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए तेल कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की सलाह। किसानों और पर्यावरण को होगा सीधा फायदा।

29 May 2026  |  44

 

 

नई दिल्ली: देश भर के वाहन चालकों के लिए ईंधन (फ्यूल) को लेकर एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार अब पेट्रोल पंपों पर 'सुपरमार्केट-स्टाइल चॉइस' (Supermarket-style choice) नीति लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस नए नियम के लागू होने के बाद, उपभोक्ता अपनी गाड़ी के इंजन की क्षमता और कम्पैटिबिलिटी के आधार पर खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें किस ब्लेंड (मिश्रण) का पेट्रोल लेना है।

'द मिंट' की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी प्रमुख तेल कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर E20, E22, E25 और E30 ईंधन वेरिएंट की बिक्री के लिए अलग से डिस्पेंसिंग (ईंधन वितरण) इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की सलाह दी है।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) की मंजूरी और सरकार का लक्ष्य

यह कदम ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा नए उच्च-इथेनॉल मिश्रणों के मानक (नियम) लागू करने और हाल ही में अप्रैल में सरकार द्वारा पूरी तरह से इथेनॉल से चलने वाले वाहनों (Flex-Fuel Vehicles) को हरी झंडी देने के प्रस्ताव के बाद उठाया गया है।

लक्ष्य 2027-2028: भारत ने पहले ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का ऐतिहासिक लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। अब इस नई नीति के जरिए सरकार का लक्ष्य अगले 1-2 साल में (यानी 2027-2028 तक) इस मिश्रण को बढ़ाकर 25% (E25) और 30% (E30) तक ले जाना है।

इस गेम-चेंजर नीति के पीछे सरकार का त्रिकोणीय मकसद:

1. अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा की बचत

भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात (Import) के जरिए पूरा करता है। पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को जितना अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विकल्प मिलेगा, उतनी ही तेजी से कच्चे तेल का आयात घटेगा। इससे देश के खजाने से विदेशों में जाने वाले अरबों डॉलर की सीधी बचत होगी।

2. किसानों और चीनी मिलों की बल्ले-बल्ले

चूंकि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्के और खराब हो चुके अनाजों से तैयार किया जाता है, इसलिए इसकी मांग बढ़ने का सीधा लाभ देश के अन्नदाताओं को मिलेगा। चीनी मिलों और किसानों को उनकी फसलों का सही और समय पर दाम मिल सकेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी।

3. प्रदूषण पर करारी चोट

पारंपरिक पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल पर्यावरण के लिए काफी अनुकूल माना जाता है। इसके दहन (जलने) से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी बेहद जहरीली और हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बहुत कम होता है। यह कदम देश के महानगरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

ऑटोमोबाइल कंपनियों को निर्देश और चुनौतियां

सरकार ने देश की तमाम कार और टू-व्हीलर निर्माता कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे अब ऐसे इंजनों का निर्माण करें जो न सिर्फ E20, बल्कि उससे ऊपर E25, E27 और E30 ईंधन को भी बिना किसी तकनीकी खराबी या परफॉरमेंस में कमी के आसानी से झेल सकें।

ईंधन वेरिएंटइथेनॉल का प्रतिशतउपयोगिता
E2020% इथेनॉल + 80% पेट्रोलवर्तमान में कई शहरों में उपलब्ध
E22 / E2522% से 25% इथेनॉलआगामी मध्यम वेरिएंट
E3030% इथेनॉल + 70% पेट्रोलफ्लेक्स-फ्यूल और आधुनिक इंजनों के लिए

 

पेट्रोल पंपों पर दिखेंगे बड़े बदलाव

इस व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए तेल कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर अलग डिस्पेंसिंग सिस्टम, स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लेंडिंग कंट्रोल और फ्यूल क्वालिटी मॉनिटरिंग मैकेनिज्म में भारी निवेश करना होगा।

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) पर बिकने वाले हर इथेनॉल-ब्लेंड पेट्रोल की सटीक जानकारी और कीमत डिस्पेंसिंग मशीन पर साफ-साफ अक्षरों में प्रदर्शित करनी होगी। साथ ही हर वेरिएंट के नोजल पर अलग रंग या स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा ताकि किसी भी तरह के भ्रम से बचा जा सके।

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