NEET-UG 2026 पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा जांच की निगरानी, NTA को फटकार—'युवाओं को इस तरह निराश नहीं कर सकते'

शीर्ष अदालत ने केंद्र और शिक्षा मंत्रालय से मांगा एक्शन प्लान, सुचिता सुनिश्चित करने के लिए दिया 6 हफ्ते का समय; सॉलिसिटर जनरल बोले—'पीएम मोदी खुद रख रहे हैं नजर'।

29 May 2026  |  72

 

 

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET-UG 2026' के पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने एलान किया कि वह इस पूरे मामले की जांच की खुद कुछ समय तक सीधी निगरानी (Monitoring) करेगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (NTA) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने इस घटना को देश के युवाओं के लिए बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जो कुछ भी हुआ है वह बर्दाश्त के बाहर है; देश के होनहार युवाओं को इस तरह प्रणाली (सिस्टम) से निराश नहीं किया जा सकता।

शिक्षा मंत्रालय को आदेश: NTA को मजबूत करने के लिए दाखिल करें अलग हलफनामा

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय को एक अलग और विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

अदालत का स्पष्ट निर्देश: सरकार हलफनामे में एक ऐसी पुख्ता और पारदर्शी व्यवस्था बनाने का पूरा ब्योरा दे, जिसके तहत भविष्य में NEET परीक्षाओं को आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया को NTA द्वारा हर साल संस्थागत और सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सके। कोर्ट ने सरकार से सीधे पूछा है कि आखिर NTA को कैसे मजबूत बनाया जाए और NEET परीक्षा को पूरी तरह से 'लीक-प्रूफ' और सुरक्षित कैसे किया जाए?

पीठ ने साफ किया कि इस हलफनामे में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि विशेष सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और विषय विशेषज्ञों की एक व्यापक टीम के माध्यम से NTA के भीतर संस्थागत अनुभव और विशेषज्ञता को कैसे विकसित किया जाएगा।

केंद्र और NTA को मिला 6 सप्ताह का समय; दोबारा गलती पर तय होगी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस पूरे प्रयास का एकमात्र उद्देश्य यह होना चाहिए कि NTA के पास साल 2024 और 2026 जैसे NEET परीक्षा विवादों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आवश्यक भौतिक (Physical) और बौद्धिक (Intellectual) संसाधन मौजूद हों। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और NTA को अपनी ठोस कार्ययोजना (Action Plan) पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।

अदालत ने केंद्र को सचेत करते हुए कहा:

मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने से रोकने के लिए सरकार और सभी संबंधित अधिकारियों द्वारा हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि बार-बार देश की इतनी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के पेपर कैसे लीक हो जा रहे हैं?

शीर्ष अदालत ने दोटूक कहा कि अगर भविष्य में ऐसी घटना दोबारा होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों की जवाबदेही और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

सुनवाई के मुख्य अंश: डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर संज्ञान

विवरणकोर्ट की कार्रवाई / स्टेटस
समिति की रिपोर्टपीठ ने मामले के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन और NTA द्वारा दाखिल जवाबों का संज्ञान लिया।
समय सीमासरकार को सुधारों का खाका तैयार करने के लिए 6 हफ्ते की मोहलत दी गई है।
भविष्य की गांरटीकोर्ट का मुख्य फोकस इस बात पर है कि 2024 और 2026 जैसे विवाद फिर कभी न दोहराए जाएं।

 

पीएम मोदी खुद रख रहे हैं सीधे नजर: सॉलिसिटर जनरल

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस पूरे मामले को लेकर अत्यंत गंभीर है। उन्होंने देश को भरोसा दिलाते हुए कोर्ट को सूचित किया कि इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मुद्दे पर सीधे नजर रख रहे हैं। सरकार देश की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और गरिमा बनाए रखने के लिए हर मुमकिन कदम उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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