मिडिल ईस्ट में फिर युद्ध की आहट: हिजबुल्लाह के हमलों से भड़का इजरायल, लेबनान में दोबारा सैन्य घुसपैठ की दी धमकी

1500 से ज्यादा बार टूटा सीजफायर; लेबनान सीमा पर इजरायली महिला सैनिक की मौत के बाद भड़के तनाव के बीच नेतन्याहू सरकार का रुख सख्त।

29 May 2026  |  28

 

 

यरूशलेम/बेरुत। इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ताएं जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ इजरायली सैन्य अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर हिजबुल्लाह ने इजरायली नागरिकों और सैनिकों को निशाना बनाना बंद नहीं किया, तो इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) लेबनान के भीतर फिर से बड़ी जमीनी घुसपैठ की कार्रवाई कर सकती हैं।

सीमाई इलाकों में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय निवासियों के लिए सायरन की आवाजें अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। हाल ही में 27 मई 2026 को गैलीली क्षेत्र में हुए एक भीषण हमले में एक इजरायली महिला सैनिक की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसने इस सुलगती आग में घी का काम किया है।

खोखला साबित हुआ सीजफायर: 1,500 से अधिक बार हुआ उल्लंघन

क्षेत्र में इस ताजा तनाव की पटकथा इस साल की शुरुआत में ही लिख दी गई थी। गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे, जिसमें ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई शीर्ष अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी थी।

हालांकि, 17 अप्रैल 2026 को दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी, लेकिन यह समझौता महज कागजी साबित हुआ। तब से अब तक कुल 1,500 से अधिक बार युद्धविराम का उल्लंघन किया जा चुका है, जिसमें से अकेले 400 उल्लंघन लेबनान सीमा पर ड्रोन हमलों, रॉकेट फायरिंग और सीमा पार घुसपैठ के रूप में दर्ज हुए हैं।

"परमाणु पर बात, लेकिन आतंकी फंडिंग पर चुप्पी"— सैन्य विशेषज्ञों की चिंता

इजरायली सेना के हमलों में हिजबुल्लाह के कई बड़े मिसाइल लॉन्चर और हथियार डिपो तबाह किए गए हैं, लेकिन उसकी पुनर्निर्माण क्षमता अभी भी बरकरार है। सैन्य संघर्षों पर नजर रखने वाले इजरायली थिंक टैंक 'अल्मा' की संस्थापक लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) सारित जेहावी का कहना है कि चल रही शांति वार्ताएं जमीनी हकीकत से दूर हैं।

"इन वार्ताओं में सारा ध्यान केवल परमाणु ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर दिया जा रहा है, जबकि ईरान समर्थित और पोषित आतंकी संगठनों की जमीनी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। जब तक ईरान से होने वाली हथियारों की गुप्त सप्लाई और फंडिंग नहीं रुकेगी, तब तक स्थायी शांति असंभव है।" — लेफ्टिनेंट कर्नल सारित जेहावी, संस्थापक (अल्मा सेंटर)

इजरायल में अक्टूबर चुनाव: नेतन्याहू सरकार नहीं दिखाएगी नरमी

इस पूरे सैन्य संकट के पीछे इजरायल की घरेलू राजनीति का भी बड़ा हाथ माना जा रहा है। अक्टूबर 2026 में इजरायल में आम चुनाव होने हैं। ऐसे चुनावी माहौल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार हिजबुल्लाह के आगे किसी भी तरह की नरमी दिखाकर कमजोर नहीं दिखना चाहती, खासकर तब जब देश के सैनिकों की जान जा रही हो।

'सफेद' जैसे इजरायल के सीमावर्ती शहरों में स्कूल और सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप है। लेबनान की तरफ से भी इजरायली हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की शिकायतें संयुक्त राष्ट्र (UNIFIL) तक पहुंच रही हैं। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की यह गहरी खाई और बैकस्टेज से मिल रहा ईरान का समर्थन साफ इशारा कर रहा है कि यह अस्थायी शांति किसी भी वक्त एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकती है।

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