भोपाल में एसटीएफ का बड़ा एक्शन: पटेल सिटी में चल रही अवैध कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़, 50 हजार बोतलें जब्त, 10 गिरफ्तार

एक्सपायरी डेट मिटाकर दोबारा हो रही थी री-पैकेजिंग; स्थानीय पुलिस रही बेखबर, ग्वालियर और महाकौशल के जिलों में फैला था नशे का काला नेटवर्क।

29 May 2026  |  79

 

 

भोपाल। मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राजधानी भोपाल के एयरपोर्ट रोड स्थित पटेल सिटी में चल रहे एक बड़े अंतर-जिला नशीली और अमानक कफ सिरप के काले कारोबार का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ की टीम ने मौके पर छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप की करीब 49,920 शीशियां बरामद की हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने तीन नाबालिगों सहित कुल 10 आरोपियों को दबोचा है, जो सीहोर, राजगढ़ और भोपाल के रहने वाले हैं।

यह अवैध फैक्ट्री पिछले सात महीनों से घनी आबादी वाले इलाके में धड़ल्ले से संचालित हो रही थी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय गांधीनगर थाना पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

खेल 'री-पैकेजिंग' का: एक्सपायरी डेट हटाकर छप रही थी ₹210 की फर्जी कीमत

एसटीएफ की शुरुआती पूछताछ में जो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, उसके मुताबिक आरोपी थोक बाजार से भारी मात्रा में 'आनरेक्स' और 'आफ कफ' नामक सिरप के कार्टन मंगवाते थे। इसके बाद मकान मालिक जयदीप सिंह से किराए पर लिए गए इस मकान में मशीनों के जरिए मूल लेबल को खरोंच दिया जाता था। बिना किसी वैध बैच नंबर के, एक्सपायर्ड और अमानक माल को नए रैपर और ₹210 की कीमत छापकर दोबारा पैक किया जा रहा था ताकि पकड़े जाने पर मुख्य सोर्स का पता न लगाया जा सके। एसटीएफ ने कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं।

ये आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे

मौके से गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में:

सीहोर (श्यामपुर व इछावर): आकाश भाटी, नरेश भाटी, चन्द्रपाल मुखिया और हरिओम मोगिया।

राजगढ़: धानसिंह और अजय मोगिया।

भोपाल (परवलिया): अकील खान।

इनके अलावा गिरोह में शामिल तीन नाबालिगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मौके से भारी मात्रा में खाली शीशियां, रैपर, सीलिंग मशीन और एक लोडिंग वाहन भी जब्त किया गया है।

ग्वालियर से महाकौशल तक था टारगेट, दवा बाजार रडार पर

भोपाल को इस अवैध कारोबार का मुख्य हब बनाया गया था। यहां से री-पैकेजिंग के बाद इस जानलेवा नशे की खेप को ग्वालियर के साथ-साथ महाकौशल क्षेत्र के रीवा, सतना, सीधी, विदिशा और आसपास के ग्रामीण जिलों में सप्लाई किया जा रहा था। एसटीएफ अब उस मुख्य सप्लायर और दवा बाजार के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स की कुंडली खंगाल रही है, जो इस अवैध रैकेट को कच्चे माल की आपूर्ति कर रहे थे। इस जांच में फूड एंड ड्रग्स विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।

"इस अवैध री-पैकेजिंग रैकेट में शामिल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें तीन नाबालिग हैं। ये लोग भोपाल से अन्य जिलों में सप्लाई चेन चला रहे थे। मामले में बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज (कहाँ से माल आया और कहाँ गया) की सघन जांच की जा रही है, जल्द ही मुख्य सप्लायर्स को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।" — राहुल लोढ़ा, डीआईजी, एसटीएफ (मध्य प्रदेश)

अतीत से नहीं लिया सबक, रडार पर स्थानीय पुलिस

भोपाल के जगदीशपुर (बैरसिया रोड), ईंटखेड़ी और बगरौदा औद्योगिक क्षेत्र में पहले भी ऐसी अवैध फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस की सुस्ती बरकरार रही। अमानक सिरप का यह धंधा कितना जानलेवा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में अमानक कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से 25 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब ड्रग विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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