कराची / इस्लामाबादभीषण गर्मी के चरम मौसम और ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मुकद्दस त्योहार के बीच पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पिछले साल भारत द्वारा सिंधु जल संधि स्थगित कर की गई 'वाटर स्ट्राइक' के बाद से देश में गहराए जल-संकट ने अब कराची में त्राहि-त्राहि मचा दी है। शहर के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में पानी की सप्लाई ठप है, जिससे त्योहार के मौके पर भी हजारों परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते नजर आए।
इस मानवीय संकट ने पाकिस्तान की आंतरिक सियासत में भी भूचाल ला दिया है। जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने ईद के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए प्रांतीय सिंध सरकार (PPP) के कुप्रबंधन पर तीखा हमला बोला और कराची के मेयर मुर्तजा वहाब के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'शहर में पानी की कोई कमी नहीं है'।
70% कराची में सूखा, महंगे 'वॉटर टैंकर' माफिया का राज
पाकिस्तानी मीडिया हाउस एआरवाई न्यूज (ARY News) की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची के हालात बेहद चिंताजनक हैं। बढ़ते पारे के बीच लोग अपनी जेबें ढीली कर महंगे निजी टैंकर मंगाने को मजबूर हैं।
पिछले दो हफ्तों से इन प्रमुख इलाकों में हाहाकार:
गुलिस्तान-ए-जौहर और गुलशन-ए-इकबाल
अजीजाबाद और लियाकताबाद
नॉर्थ नाजिमाबाद, नाजिमाबाद और नॉर्थ कराची
ईद पर कचरे और गंदगी के ढेर में तब्दील हुआ शहर
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम ने केवल पानी की किल्लत ही नहीं, बल्कि शहर की बदहाल साफ-सफाई को लेकर भी 'सिंध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड' को आड़े हाथों लिया।
"इस सरकारी एजेंसी को 43 अरब रुपये का भारी-भरकम बजट मिला, लेकिन इसके बावजूद ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के जानवरों के कचरे का सही निपटारा करने में यह पूरी तरह नाकाम रही। जनता के टैक्स का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।"
— हाफिज नईम-उर-रहमान, प्रमुख, जमात-ए-इस्लामी
उन्होंने सीधे तौर पर सवाल दागा कि सिंध प्रांत में पिछले 18 साल से लगातार शासन में रहने के बावजूद पीपीपी आज तक कराची के नागरिकों को पीने का पानी जैसी बुनियादी जरूरत क्यों मुहैया नहीं करा पाई है?
संकट के बीच जमात-ए-इस्लामी ने संभाला मोर्चा
एक तरफ जहां सरकारी तंत्र पंगु नजर आया, वहीं हाफिज नईम ने बताया कि कराची के नागरिकों ने इतनी प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद अपनी धार्मिक परंपराओं को पूरी शिद्दत से निभाया। उन्होंने जानकारी दी कि उनके संगठन (जमात-ए-इस्लामी) ने स्थानीय समुदायों की मदद के लिए पूरे शहर में 150 से अधिक स्थानों पर सामूहिक कुर्बानी की व्यवस्था की, ताकि लोगों को इस संकट के समय थोड़ी राहत मिल सके।
कराची के दोहरे संकट का पूरा लेखा-जोखा
| संकट का मोर्चा | जमीनी हकीकत | प्रशासनिक/कूटनीतिक विफलता |
|---|---|---|
| जल सुरक्षा (Water Crisis) | 70% इलाकों में 2 हफ्तों से पानी गायब, जनता टैंकर माफिया के भरोसे। | बाहरी: भारत द्वारा सिंधु जल संधि का स्थगन।
आंतरिक: PPP सरकार का 18 साल का कुप्रबंधन। |
| सफाई व्यवस्था (Solid Waste) | कुर्बानी के बाद सड़कों पर फैली गंदगी, महामारी का खतरा। | 43 अरब रुपये का बजट होने के बावजूद वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड पूरी तरह फेल। |
संपादकीय दृष्टिकोण:
यह स्थिति दर्शाती है कि कश्मीर के पहलगाम में आतंकी साजिश रचने वाले पाकिस्तान को भारत ने जब 'वॉटर स्ट्राइक' के जरिए कड़ा कूटनीतिक जवाब दिया, तो उसकी गूंज इस्लामाबाद से कराची तक सुनाई दे रही है। बाहरी दबाव और अंदरूनी भ्रष्टाचार के दोहरे पाटों के बीच पिसी कराची की आवाम अब यह समझ चुकी है कि आतंकवाद को पालने की कीमत अंततः देश के विकास और बुनियादी हकों की बलि देकर ही चुकानी पड़ती है।