सीबीएसई पोर्टल पर बड़ा साइबर अटैक: 2 मिनट में आए 15 लाख फर्जी हिट्स, जानिए क्या है 'DoS अटैक' जिसने बढ़ाई बोर्ड की टेंशन

हैकर्स ने सिस्टम ठप करने के लिए झोंका फर्जी ट्रैफिक... CBSE की सुरक्षा टीम ने नाकाम की बड़ी साजिश, 16 हजार छात्रों के आवेदन सुरक्षित!

02 Jun 2026  |  105

 

नई दिल्ली।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल पर हाल ही में एक बड़ा साइबर हमला करने की कोशिश की गई। जब हजारों छात्र अपने नंबरों की दोबारा जांच के लिए पोर्टल का इस्तेमाल कर रहे थे, ठीक उसी वक्त हैकर्स ने भारी मात्रा में फर्जी ट्रैफिक भेजकर पूरे सिस्टम को क्रैश करने की साजिश रची। बोर्ड के अनुसार, महज दो मिनट के भीतर पोर्टल पर करीब 15 लाख हिट्स दर्ज किए गए। हालांकि, सीबीएसई की मुस्तैद साइबर सुरक्षा टीम ने इस हमले को नाकाम कर दिया और 16,000 से ज्यादा छात्रों के आवेदन सफलतापूर्वक प्रोसेस किए गए।

2 मिनट का खेल: 15 लाख हिट्स और फाइलों में सेंध लगाने की कोशिश

सीबीएसई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर इस साइबर हमले की विस्तृत जानकारी साझा की। बोर्ड ने बताया कि जिस वक्त यह हमला हुआ, उस समय पोर्टल पर एक साथ 8,000 से ज्यादा असली यूजर्स (छात्र) एक्टिव थे। इसी दौरान हैकर्स ने Denial-of-Service (DoS) अटैक के जरिए सिस्टम को निशाना बनाया।

केवल दो मिनट में 15 लाख फर्जी हिट्स भेजने के अलावा, हैकर्स ने सिस्टम की फाइलों तक अनधिकृत पहुंच (Unauthorized Access) बनाने के लिए भी 1 लाख से ज्यादा प्रयास किए। इतनी बड़ी संदिग्ध गतिविधि के बावजूद बोर्ड की टेक्निकल टीम ने मोर्चा संभाला और दोपहर 3 बजे तक 16,000 से अधिक छात्रों के री-इवैल्यूएशन फॉर्म सुरक्षित रूप से जमा करा लिए गए।

समझिए क्या होता है डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) अटैक?

डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) एक ऐसा खतरनाक साइबर हमला है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसी वेबसाइट, सर्वर या ऑनलाइन सर्विस को डाउन करके उसे वास्तविक यूजर्स के लिए अनुपलब्ध (Unavailable) बनाना होता है।

सरल शब्दों में समझें: जैसे किसी दुकान के दरवाजे पर अचानक हजारों फर्जी खरीदार आकर खड़े हो जाएं, जिससे असली ग्राहक अंदर न जा सके। ठीक वैसे ही, हैकर्स बहुत कम समय में कंप्यूटर और बॉट्स के जरिए वेबसाइट पर क्षमता से अधिक फर्जी रिक्वेस्ट भेजते हैं। इससे सर्वर पर अचानक लोड बढ़ जाता है और वेबसाइट या तो बेहद धीमी हो जाती है या पूरी तरह ठप (Crash) हो जाती है।

क्यों बेहद खतरनाक माने जाते हैं ऐसे साइबर हमले?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, DoS और DDoS (डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमले डिजिटल दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा हैं, जिसके पीछे कई वजहें हैं:

जरूरी सेवाओं का ठप होना: यदि ऐसा हमला किसी बैंकिंग प्लेटफॉर्म, सरकारी पोर्टल, अस्पताल या शैक्षणिक वेबसाइट पर हो, तो लाखों लोगों का काम रुक जाता है और पैनिक की स्थिति बन जाती है।

ध्यान भटकाने की चाल (Smoke Screen): कई बार हैकर्स DoS अटैक का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षा टीम का ध्यान भटकाने के लिए करते हैं। जब पूरी टीम सर्वर को चालू करने में व्यस्त होती है, तब हैकर्स बैकएंड से मुख्य डेटा या पैसे चुराने जैसी दूसरी बड़ी वारदातों को अंजाम दे देते हैं।

सीबीएसई पर हुए इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश के महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे, फायरवॉल और चौबीसों घंटे निगरानी (24/7 Monitoring) की कितनी सख्त जरूरत है।

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