नई दिल्ली।
दिग्गज टेक कंपनी एपल (Apple) के खिलाफ भारत में चल रही एंटीट्रस्ट (एकाधिकार विरोधी) जांच अब एक बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के बढ़ते दबाव के बीच, एपल ने आखिरकार भारत में अपने बिजनेस से जुड़ा महत्वपूर्ण फाइनेंशियल डेटा (वित्तीय जानकारी) रेगुलेटर को सौंपने पर सहमति जता दी है।
यह पूरी जांच एपल के 'ऐप स्टोर प्रैक्टिस' (App Store Practices) और 'इन-ऐप पेमेंट' (In-App Payment) से जुड़े सख्त नियमों को लेकर की जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी द्वारा इस डेटा को साझा किए जाने के बाद, उन पर भारत में भारी जुर्माना लगाने की दिशा में जांच तेजी से आगे बढ़ सकती है।
क्या है पूरा मामला और क्यों घिरी एपल?
रॉयटर्स (Reuters) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) पिछले काफी समय से इस बात की जांच कर रहा है कि क्या एपल ने स्मार्टफोन और ऐप मार्केट में अपनी मजबूत स्थिति (Market Power) का गलत इस्तेमाल किया है। सीसीआई का आरोप है कि एपल अपने ऐप स्टोर पर मौजूद डेवलपर्स को अपने ही इन-ऐप पेमेंट सिस्टम का उपयोग करने के लिए मजबूर करती है, जिस पर कंपनी मोटा कमीशन वसूलती है। इसे बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के खिलाफ माना गया है।
25 जून तक का मिला है समय
जांच प्रक्रिया के तहत, 21 मई को सीसीआई के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान एपल ने भारत से जुड़े अपने वित्तीय आंकड़े पेश करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। रेगुलेटर ने कंपनी की इस मांग को स्वीकार करते हुए डेटा जमा करने के लिए 25 जून तक की अंतिम मोहलत दी है।
यह डेटा सामने आने के बाद सीसीआई यह आकलन कर पाएगा कि एपल ने भारत में ऐप स्टोर के जरिए कितनी कमाई की है और उसी के आधार पर संभावित वित्तीय जुर्माने का आकार (Penalties) तय किया जाएगा।
भारत में एपल के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय बाजार में आईफोन (iPhone) की बढ़ती लोकप्रियता और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत के उभार के बीच, यह कानूनी विवाद एपल के लिए अब तक की सबसे बड़ी रेगुलेटरी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
यदि सीसीआई की अंतिम रिपोर्ट में एपल को बाजार विरोधी प्रथाओं (Anti-competitive practices) का दोषी पाया जाता है, तो कंपनी पर न केवल उसकी भारतीय कमाई के प्रतिशत के आधार पर बड़ा आर्थिक जुर्माना लग सकता है, बल्कि उसे भारत में अपने ऐप स्टोर के संचालन और पेमेंट नियमों में भी बड़े बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। ठीक इसी तरह की जांच का सामना एपल वर्तमान में यूरोपीय संघ और अमेरिका में भी कर रही है।