भारत में एपल पर कसेगा शिकंजा! CCI को वित्तीय डेटा देने पर बनी सहमति; एंटीट्रस्ट जांच में लग सकता है भारी जुर्माना

ऐप स्टोर और पेमेंट सिस्टम के एकाधिकार विवाद में झुकी अमेरिकी टेक दिग्गज; 25 जून तक सौंपना होगा डेटा, बदल सकता है भारत का डिजिटल इकोसिस्टम।

04 Jun 2026  |  116

 

 

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी एपल (Apple) की मुश्किलें भारत में बढ़ती नजर आ रही हैं। ऐप स्टोर और इन-ऐप पेमेंट सिस्टम में कथित एकाधिकार और बाजार की स्थिति का गलत इस्तेमाल करने के मामले में चल रही एंटीट्रस्ट (Antitrust) जांच अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपल भारत के प्रतिस्पर्धा नियामक, कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) को अपनी वित्तीय जानकारी (Financial Data) सौंपने पर सहमत हो गई है। माना जा रहा है कि इस डेटा के आधार पर सीसीआई आगे चलकर कंपनी पर भारी जुर्माना लगा सकता है।

CCI को 25 जून तक डेटा सौंपेगी एपल

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीसीआई इस बात की जांच कर रहा है कि क्या एपल ने आईफोन ऐप इकोसिस्टम में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग किया है। इस जांच को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए एपल का वित्तीय डेटा बेहद जरूरी था।

बीती 21 मई को हुई सुनवाई के दौरान एपल ने नियामक से अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसके बाद सीसीआई ने कंपनी को 25 जून 2026 तक का समय दिया है। यह डेटा मिलने के बाद नियामक संभावित जुर्माने की राशि और आगे की कार्रवाई का आधार तय करेगा। इसे भारत में एपल के लिए अब तक की सबसे बड़ी रेगुलेटरी चुनौती माना जा रहा है।

क्या हैं एपल पर आरोप? क्यों शुरू हुई जांच?

यह पूरा विवाद साल 2021 में तब शुरू हुआ था, जब डेटिंग ऐप 'टिंडर' की पैरेंट कंपनी और एलायंस ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन (ADIF) जैसी संस्थाओं ने एपल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

सीमित विकल्प और मनमानी: आईफोन यूजर्स तक पहुंचने के लिए 'ऐप स्टोर' ही एकमात्र जरिया है। आरोप है कि एपल इस स्थिति का फायदा उठाकर डेवलपर्स पर अपनी शर्तें थोपता है।

पेमेंट सिस्टम की अनिवार्यता: डेवलपर्स को ऐप के भीतर होने वाली खरीदारियों (In-App Purchases) के लिए अनिवार्य रूप से एपल के ही पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिस पर कंपनी भारी कमीशन वसूलती है।

हालांकि, एपल इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों को यूजर्स की सुरक्षा के लिए जरूरी बताता है।

एक नजर में: एपल एंटीट्रस्ट मामला

मुख्य बिंदुविवरण
जांच एजेंसीकॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI)
मामले की शुरुआतसाल 2021 (टिंडर और ADIF की शिकायत पर)
डेटा जमा करने की अंतिम तिथि25 जून 2026
जांच का मुख्य केंद्रऐप स्टोर की नीतियां और इन-ऐप पेमेंट सिस्टम
एपल की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी~2% से बढ़कर अब लगभग 9% हुई

 

भारतीय स्टार्टअप्स और डिजिटल बाजार पर क्या होगा असर?

एपल के लिए भारत एक बेहद महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है, जहां पिछले कुछ सालों में इसकी स्मार्टफोन मार्केट हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से छलांग लगाकर करीब 9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीसीआई का फैसला एपल के खिलाफ आता है, तो भारतीय ऐप डेवलपर्स और घरेलू स्टार्टअप्स को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें थर्ड-पार्टी पेमेंट सिस्टम इस्तेमाल करने और ऐप डिस्ट्रीब्यूशन के मामलों में अधिक आजादी मिल सकती है। यह फैसला भविष्य में भारत के टेक नियमों और वैश्विक तकनीकी कंपनियों (Big Tech) की नीतियों को तय करने में एक नजीर साबित होगा।

अन्य खबरें